नई दिल्ली के संसद भवन एनेक्सी में रविवार सुबह 11 बजे बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और वॉकआउट कर दिया। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिससे ठीक पहले सरकार ने सुचारू कामकाज के लिए यह बैठक बुलाई थी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित 10 से ज्यादा विपक्षी दलों ने बैठक शुरू होने के महज 15 मिनट बाद ही बाहर निकलकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने टीएमसी के बागी सांसदों के एक गैर-मान्यता प्राप्त गुट को इस बैठक में शामिल होने का न्योता क्यों दिया। बैठक शुरू होते ही विपक्षी नेताओं ने टीएमसी से अलग हुए 20 बागी सांसदों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। महुआ मोइत्रा समेत अन्य नेताओं का तर्क था कि लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक इस नए गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। हालांकि, विपक्ष का यह वॉकआउट केवल सांकेतिक था और कुछ देर बाद सभी विपक्षी सांसद दोबारा चर्चा में शामिल होने के लिए बैठक में लौट आए। तय कार्यक्रम के मुताबिक, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 24 दिनों के दौरान 19 महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बागी गुट को लेकर छिड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद
इस विवाद की पृष्ठभूमि पिछले महीने से जुड़ी है, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विलय का दावा किया था। शनिवार को ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इन बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी थी। ठीक इसी तरह, 22 जून को शिवसेना के उद्धव गुट को छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 बागी सांसदों को भी अलग बैठने की मंजूरी मिल चुकी है। विपक्ष का कहना है कि जब तक इन बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं कोर्ट या स्पीकर के पास लंबित हैं, तब तक उन्हें ऐसी बैठकों में नहीं बुलाया जाना चाहिए था।
नेताओं और मंत्रियों के आधिकारिक बयान
बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी दलों से संसद को शांतिपूर्वक चलाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा, "संसद हम सभी की है और इसमें हंगामा करने से किसी भी पक्ष का कोई फायदा नहीं होने वाला है।" दूसरी तरफ, बागी गुट के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि वे आज एक नई राजनीतिक पार्टी एनसीपीआई के नेता के तौर पर इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे। वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब स्पीकर ने अभी तक अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला नहीं लिया है, तो संसदीय कार्य मंत्रालय ने किस कानूनी आधार पर इन बागी सदस्यों को आमंत्रित किया।