बिकापुर के आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित 'प्रयास' आवासीय विद्यालय के छात्र अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन और विभाग की लापरवाही से तंग आकर आज सैकड़ों छात्रों के सब्र का बांध टूट गया। अपनी जायज मांगों को लेकर ये छात्र किसी गाड़ी या बस से नहीं, बल्कि करीब 10 किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करके सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। छात्रों का आरोप है कि स्कूल में मूलभूत सुविधाएं तो दूर, ढंग का खाना और पढ़ाई तक नसीब नहीं हो रही है।
कोचिंग और पढ़ाई ठप शिक्षकों की भारी कमी
कलेक्टरेट पहुंचे छात्रों ने स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। छात्रों का कहना है कि जिस 'प्रयास' विद्यालय को उनके बेहतर भविष्य के लिए बनाया गया था, वहां अब कोचिंग के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं। बिना टीचर्स के सिलेबस अधूरा पड़ा है और बोर्ड व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई बार गुहार लगाने के बाद भी शिक्षकों की कमी को पूरा नहीं किया गया, जिससे नाराज होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
अधिकारियों के आते ही बदल जाता है मेन्यू
सुविधाओं के फंड में हेराफेरी का शक
आक्रोशित छात्रों के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि अफसरों को इस बात की खबर नहीं है। अधिकारी स्कूल आते जरूर हैं, लेकिन वे छात्रों से बात कर उनकी जमीनी समस्याओं को सुनने के बजाय सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करके लौट जाते हैं। इसके अलावा, छात्रों ने बाल कटिंग (हेयरकट) और अन्य जरूरी दैनिक सुविधाओं में मिलने वाले बजट और व्यवस्थाओं में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता (घोटाले) का आरोप लगाया है।
जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
मामले को तूल पकड़ता देख और कलेक्टरेट के बाहर छात्रों का हुजूम देखकर आदिवासी विकास विभाग के आला अधिकारी हरकत में आए। विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला ने खुद छात्रों के बीच पहुंचकर उनसे लंबी चर्चा की और उनकी सभी शिकायतों को सुना। शुक्ला ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि विद्यालय की पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।