ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आदिवासी विकास विभाग की विशेष केंद्रीय सहायता उपयोजना के तहत विकासखंड बागबाहरा के माडा ग्राम जोरातराई की 19 अनुसूचित जनजाति महिला पशुपालकों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए धमतरी जिले का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। यह भ्रमण 3 जुलाई को आयोजित किया गया, जिसमें डेयरी इकाई से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याओं ने आधुनिक पशुपालन की तकनीकों को नजदीक से समझा और उन्हें अपने गांव में अपनाने की जानकारी हासिल की।
महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने पर जोर
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन की अधिकांश जिम्मेदारी महिलाएं ही निभाती हैं। पशुओं की देखभाल, चारा प्रबंधन, स्वास्थ्य संरक्षण और गोबर के उपयोग जैसे कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। इसी कारण केंद्र और राज्य सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है।
गौठान और गौशाला में देखा सफल मॉडल
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान महिला पशुपालकों ने मुख्य ग्राम इकाई भोथली के ग्राम बोडरा स्थित गौठान और गोविंदी देव गौशाला का अवलोकन किया। यहां उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुओं की नस्ल सुधार, अधिक दूध उत्पादन और वैज्ञानिक तरीके से संचालित डेयरी प्रबंधन की व्यवस्थाओं को करीब से देखा। सफल मॉडलों को देखकर महिलाओं ने भविष्य में इन्हें अपनाने की इच्छा भी जताई।
कम लागत वाली तकनीकों की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कृत्रिम गर्भाधान, उन्नत नस्ल विकास, संतुलित पशु आहार, हरे चारे का उत्पादन और पैरा को यूरिया, नमक तथा चूने से उपचारित कर उसकी पोषण गुणवत्ता बढ़ाने जैसी कम लागत वाली तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। साथ ही कृषि के साथ पशुपालन को जोड़कर अतिरिक्त आय बढ़ाने के प्रभावी उपाय भी बताए गए।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
यह प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक भ्रमण डॉ. आर. जी. यादव और डॉ. ए.आर. घृतलहरे के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्य ग्राम योजना धमतरी के पशु प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. टी.आर. वर्मा ने महिला पशुपालकों को पशु नस्ल सुधार, पशु पोषण, संवर्धन और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। वहीं मुख्य ग्राम इकाई भोथली के सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी बी.एस. साहू ने क्षेत्र में संचालित कृत्रिम गर्भाधान और पशु पोषण से जुड़ी योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी साझा की।