Tuesday, 01 Sep 2026 भारत
ब्रेकिंग
Railway News: बीना स्टेशन पर तीसरी लाइन की कनेक्टिविटी का काम, अक्टूबर में कई ट्रेनों पर असर Youth Congress Election: मुंगेली में फर्जी मतदान पर विवाद, MP से आए 9 युवाओं पर फर्जी वोटिंग का आरोप Chhattisgarh ED Raid: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पूर्व निज सचिव के घर छापा Controversial Statement: अखिलेश किसी के गले में घंटी बांध दें तो उसी को दें वोट... लाल बिहारी यादव के बयान पर बवाल Raipur Road Accident: ट्रक और क्रेटा में सीधी भिड़ंत, एक युवक की मौत, तीन घायल Railway News: बीना स्टेशन पर तीसरी लाइन की कनेक्टिविटी का काम, अक्टूबर में कई ट्रेनों पर असर Youth Congress Election: मुंगेली में फर्जी मतदान पर विवाद, MP से आए 9 युवाओं पर फर्जी वोटिंग का आरोप Chhattisgarh ED Raid: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पूर्व निज सचिव के घर छापा Controversial Statement: अखिलेश किसी के गले में घंटी बांध दें तो उसी को दें वोट... लाल बिहारी यादव के बयान पर बवाल Raipur Road Accident: ट्रक और क्रेटा में सीधी भिड़ंत, एक युवक की मौत, तीन घायल
W 𝕏 f
होम भाजपा सीक्रेट रूम खत्म : अब आर-पार दिखेगा काम, ज्योतिरा…
सिंधिया का पारदर्शी दफ्तर
सिंधिया का पारदर्शी दफ्तर
भाजपा Featured

सीक्रेट रूम खत्म : अब आर-पार दिखेगा काम, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांच वाले दफ्तर ने बदला सरकार का वर्क कल्चर

संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने नई दिल्ली के संचार भवन में अपने पारंपरिक बंद कार्यालय को पूरी तरह पारदर्शी ‘ग्लास ऑफिस’ में बदल दिया है। भारी दीवारों और पुराने फर्नीचर की जगह अब शीशे की दीवारें और मॉडर्न इंटीरियर हैं, जिससे कार्यालय खुला और सुलभ दिखाई देता है।

कीर्तिमान न्यूज
22 May 2026, 03:25 PM
नई दिल्ली

मोदी सरकार में 'पारदर्शिता' (Transparency) सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि काम करने का नया तरीका बन चुकी है। इसका सबसे ताजा और हैरान कर देने वाला उदाहरण इन दिनों नई दिल्ली के संचार भवन में देखने को मिल रहा है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने कार्यालय का ऐसा कायाकल्प (रिनोवेशन) कराया है, जिसे देखकर वहां से गुजरने वाले कर्मचारी और आगंतुक दंग हैं।

सिंधिया का नया दफ्तर अब कोई बंद सरकारी कमरा नहीं, बल्कि पूरी तरह से शीशे का एक पारदर्शी केबिन बन चुका है।

बंद कोठरी से 'ओपन डोर पॉलिसी' तक का सफर

जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संचार मंत्रालय का कार्यभार संभाला, तब पहली मंजिल पर स्थित मंत्री का आधिकारिक कमरा दशकों पुरानी व्यवस्था की तरह चारों तरफ से पूरी तरह बंद था।

  • दमघोंटू माहौल: कमरे की बनावट ऐसी थी कि वहां न तो प्राकृतिक रोशनी (धूप) पहुंचती थी और न ही ताजी हवा।

  • कमरे के अंदर कमरा: दशकों पुरानी परंपरा के तहत मुख्य केबिन के भीतर ही एक गुप्त 'रेस्ट रूम' भी बनाया गया था।

  • फर्नीचर का अंबार: भारी-भरकम और गैर-जरूरी फर्नीचर की वजह से कमरे में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

सिंधिया का त्वरित फैसला: संचार मंत्री को लगा कि ऐसे बंद और दमघोंटू माहौल में न तो नए विचार आ सकते हैं और न ही तेजी से काम हो सकता है। उन्होंने तुरंत आदेश दिया—"इस बंद कोठरी कल्चर को खत्म करो।"

कैसे काम करती है यह 'डिजिटल युग की पारदर्शिता'?

मंत्रालय के पहले फ्लोर का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया गया है। भारी दीवारें और लकड़ी के दरवाजे हटाकर वहां हाई-क्वालिटी पारदर्शी शीशे (गिलास वॉल्स) लगा दिए गए हैं।

पुरानी व्यवस्थासिंधिया का नया 'ग्लास ऑफिस'
चारों तरफ से बंद और गुप्त कमरा।100% पारदर्शी, आर-पार दिखने वाला केबिन।
भारी-भरकम और जगह घेरने वाला पुराना फर्नीचर।स्लीक, मॉडर्न और कम जगह लेने वाला स्मार्ट इंटीरियर।
वीआईपी और आम जनता के बीच गहरी दूरी।बाहर से इशारा करके भी बात करने की सहूलियत।

अब आलम यह है कि बाहर से गुजर रहा कोई भी कर्मचारी या अपनी बारी का इंतजार कर रहा आगंतुक साफ देख सकता है कि अंदर मंत्री जी क्या फाइल देख रहे हैं या किससे मीटिंग कर रहे हैं। वहीं, अंदर बैठे सिंधिया भी बाहर की हर हलचल पर नजर रख सकते हैं।

कर्मचारी क्यों कह रहे हैं इसे 'खुला दरबार'?

संचार भवन के कर्मचारियों के बीच यह नया दफ्तर कौतूहल और तारीफ का विषय बना हुआ है। स्टाफ का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में किसी केंद्रीय मंत्री का ऐसा 'खुला दरबार' नहीं देखा।

  1. जवाबदेही बढ़ी: जब सब कुछ सामने दिख रहा हो, तो काम की रफ्तार अपने आप बढ़ जाती है।

  2. सुलभता (Accessibility): यदि कोई आगंतुक बाहर खड़ा है, तो मंत्री चाहें तो उसे सीधे देखकर तुरंत अंदर बुला लेते हैं। औपचारिकताएं और लंबा इंतजार अब खत्म हो रहा है।

  3. पॉजिटिव वाइब्स: प्राकृतिक रोशनी और खुलेपन के कारण दफ्तर का तनावपूर्ण माहौल अब बेहद पॉजिटिव और एनर्जी से भरपूर नजर आता है।

संदेश साफ है...

ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह कदम सिर्फ एक दफ्तर का रेनोवेशन नहीं है, बल्कि यह 'न्यू इंडिया' के उस वर्क कल्चर का प्रतीक है जहां सरकार और जनता के बीच की दीवारें (चाहे वो कंक्रीट की हों या लालफीताशाही की) धीरे-धीरे गिराई जा रही हैं। यह कांच का कमरा चीख-चीख कर कह रहा है—जब नियत साफ है, तो काम छुपाकर क्यों करना?

क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें