छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की प्रसिद्ध मनोहर गौशाला की विश्व रिकॉर्डधारी कामधेनु गाय ‘सौम्या’ का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। करीब 23 वर्ष की आयु में उन्होंने शांत भाव से अंतिम सांस ली। सौम्या की 54 इंच लंबी पूंछ के कारण उनका नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया था। सौम्या के निधन की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया।
मनोहर गौशाला से दोपहर बाद उनकी अंतिम समाधि यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और नम आंखों से अपनी आस्था के प्रतीक सौम्या को अंतिम विदाई दी। मंत्रोच्चार के बीच ली अंतिम विदाई गौशाला प्रबंधन के मुताबिक, सौम्या ने अपने अंतिम समय में प्रभु वाणी, मंत्रोच्चार और भक्तामर स्तोत्र का श्रवण करते हुए शांतिपूर्वक देह त्यागी।

कामधेनु मंदिर की मुख्य केंद्र थीं सौम्या
इसके बाद पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ जीरावला मनोहर जीवदया धाम में उन्हें समाधि दी गई। अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ गौशाला पहुंची। राजधानी रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित मनोहर गौशाला में वर्ष 2017 में ‘कामधेनु मंदिर’ की स्थापना की गई थी। इस मंदिर की मुख्य आकर्षण सौम्या ही थीं। गौ विशेषज्ञों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सौम्या में कामधेनु गाय से जुड़े कई विशेष लक्षण मौजूद थे। उनके शरीर पर धार्मिक शास्त्रों में बताए गए कई शुभ चिन्ह भी दिखाई देते थे। यही वजह थी कि दूर-दूर से लोग उनके दर्शन के लिए खैरागढ़ पहुंचते थे।
54 इंच लंबी पूंछ ने दिलाई विश्व पहचान
सौम्या की सबसे बड़ी विशेषता उनकी 54 इंच लंबी पूंछ थी, जिसने उन्हें विश्व रिकॉर्ड दिलाया। यह विशेषता उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाने का कारण बनी। श्रद्धालु उन्हें आस्था और धार्मिक विश्वास के प्रतीक के रूप में देखते थे। मनोहर गौशाला के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु सौम्या के दर्शन के लिए पहुंच चुके थे।
उनके जीवनकाल में करीब 142 जैन साधु-साध्वियों और आचार्यों ने उन्हें मांगलिक पाठ और णमोकार मंत्र का श्रवण कराया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के तीन राज्यपालों समेत देश के कई संतों और विशिष्ट लोगों ने भी खैरागढ़ पहुंचकर सौम्या के दर्शन किए थे। उनके निधन से गौशाला और श्रद्धालुओं में गहरा दुख व्याप्त है।