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रायपुर

खेतों में सन्नाटा : लखौली क्षेत्र के 25 से ज्यादा गांवों में थमी खरीफ की रफ्तार

लखौली अंचल और आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों में पर्याप्त बारिश न होने से खरीफ खेती प्रभावित हो गई है। किसान खेत तैयार करने के बाद भी धान की बुआई और रोपाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। कुछ किसान सीमित पानी के सहारे नर्सरी तैयार करने का जोखिम उठा रहे हैं, लेकिन बारिश की कमी से फसल चक्र बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 24 Jun 2026, 09:02 PM · अपडेट: 30 Jun 2026, 04:42 PM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मानसून को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच आरंग विकासखंड का लखौली इलाका बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। हालात यह हैं कि लखौली के 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले दो दर्जन से अधिक गांवों में अब तक सूखे जैसे हालात हैं। जून के इस पखवाड़े तक जिन खेतों में ट्रैक्टरों और हलों की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज सन्नाटा छाया हुआ है।

तैयारी पूरी, पर बादलों ने फेरा पानी

क्षेत्र के अन्नदाताओं ने खरीफ सीजन के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। खेतों की साफ-सफाई से लेकर सहकारी समितियों और बाजारों से खाद-बीज तक का इंतजाम समय पर कर लिया गया था। लेकिन आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादलों की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पर्याप्त बारिश न होने की वजह से हजारों किसानों के माथे पर खरीफ की फसल पिछड़ने की चिंता साफ देखी जा सकती है।

मजबूरी में जोखिम: सीमित संसाधनों के दम पर बुआई की कोशिश

लगातार खिंचते सूखे से बेबस होकर अब कुछ किसानों ने भारी जोखिम उठाना शुरू कर दिया है। इलाके के कई गांवों में किसान बोरवेल और उपलब्ध सीमित पानी के भरोसे किसी तरह धान की बुआई और रोपाई के लिए थरहा (नर्सरी) तैयार करने में जुट गए हैं। हालांकि, बिना मानसूनी बारिश के यह कदम किसी जुए से कम नहीं है, क्योंकि इसमें पूरी लागत डूबने का खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में झमाझम बारिश नहीं हुई, तो इस साल धान का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।

इन गांवों में थमे खेती के पहिए

बारिश न होने की मार लखौली समेत क्षेत्र के कई बड़े गांवों में साफ नजर आ रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

​फरफौद, जरौद, छतापार, बरछा, मालिडीह।

खौली, टेकारी, खमरिया, डीघारी, नारा, भानसोज।

पिपरहट्टा, गोढ़ी, बकतरा, नवागांव, परसदा, सिवनी।

उमरिया (जरौद), पलौद, कोटनी, धमनी, देवदा, सोनपैरि, गनौद, गुजरा, रीवा, कुकरा और संडी।

उमस की मार और अघोषित बिजली कटौती ने छुड़ाए पसीने

एक तरफ जहां खेती पर संकट के बादल हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनजीवन भी मौसम और व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहा है। हवा में नमी बढ़ने से दिनभर भारी उमस और चिपचिपी गर्मी रह रही है, जिससे लोग बेहाल हैं। इस पर कोढ़ में खाज का काम कर रही है बिजली विभाग की लापरवाही।

इलाके में बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। बार-बार बत्ती गुल होने से न सिर्फ लोगों के घरेलू कामकाज और छोटे धंधे ठप हो रहे हैं, बल्कि इस भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह चौपट हो रही है। फिलहाल, पूरा इलाका अब सिर्फ और सिर्फ कुदरत के भरोसे है। हर बीतते दिन के साथ किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि यह इंतजार सिर्फ बारिश का नहीं, बल्कि उनकी सालभर की रोजी-रोटी का है।

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