साढ़े छह सौ करोड़ रुपये के बड़े स्वास्थ्य घोटाले की जांच के बीच स्वास्थ्य विभाग ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉक्टर सुषमा जैन ने डाटा असिस्टेंट सुमित सिंह को नौकरी से तुरंत हटा दिया है। इसके साथ ही महानिदेशक दफ्तर में तैनात दो जूनियर असिस्टेंट को भी सस्पेंड यानी निलंबित कर दिया गया है। विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह सख्त कदम केंद्रीय खरीद एजेंसी से जुड़े मामलों और दवा सप्लाई करने वाली निजी कंपनियों से नजदीकी के आरोपों की जांच के बाद उठाया गया है।
फाइलें और लैपटॉप तुरंत जमा करने के आदेश
नौकरी से हटाए जाने के सरकारी आदेश के साथ ही सुमित सिंह को विभाग की सभी जरूरी फाइलें, दस्तावेज, सरकारी लैपटॉप और अपना पहचान पत्र तुरंत दफ्तर में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि सुमित सिंह लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद और सप्लाई से जुड़े कामकाज को देख रहे थे। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि दवा और मेडिकल सामान सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ उनके किस तरह के संबंध थे और खरीद के खेल में उनकी क्या भूमिका रही है।
जांच के दायरे में आए दो जूनियर असिस्टेंट
इसी मामले की जांच की आंच में दो जूनियर असिस्टेंट भी आ गए हैं जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि विभाग ने जांच प्रभावित न हो इसलिए अभी उनके नाम उजागर नहीं किए हैं। माना जा रहा है कि सरकारी फाइलों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही इन दोनों पर गाज गिरी है। इससे पहले भी इस घोटाले में सरकारी स्टोर से जुड़े पांच फार्मासिस्ट यानी दवा देने वाले कर्मचारियों और दो बड़े अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है।
पूर्व महानिदेशक समेत कई अफसर पहले ही जा चुके हैं जेल
स्वास्थ्य विभाग के इस महाघोटाले में कार्रवाई का दौर काफी समय से चल रहा है। मामले में पूर्व महानिदेशक डॉक्टर वत्सला अग्रवाल समेत दो बड़े अधिकारियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा विभाग के कई वरिष्ठ अफसर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी की जांच का सामना कर रहे हैं। जांच टीमें इस समय दवाओं, ऑपरेशन के सामानों और मेडिकल मशीनों की खरीद से जुड़े सभी पुराने रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं।भ्रष्टाचार पर सख्ती और चालीस से ज्यादा अफसरों का तबादला
सरकार इस समय स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाए हुए है। गड़बड़ी को रोकने के लिए हाल ही में केंद्रीय खरीद एजेंसी और उससे जुड़े अलग-अलग दफ्तरों में तैनात चालीस से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर यानी तबादला भी किया जा चुका है। इस समय एसीबी और विजिलेंस यानी सतर्कता विभाग जैसी बड़ी एजेंसियां मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी कुछ और बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं।