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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती करते किसान सीताराम पटेल
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती करते किसान सीताराम पटेल
महासमुंद

आधुनिक खेती से सफलता : ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से सीताराम पटेल ने बढ़ाई आमदनी, बने प्रेरणा

महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड के किसान सीताराम पटेल ने आधुनिक तकनीक अपनाकर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से अपनी आय में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत शुरू की गई इस खेती में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ करीब 300 क्विंटल उत्पादन मिला और लगभग 3 लाख रुपये का लाभ हुआ।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Jul 2026, 01:14 PM
सरायपाली
सरायपाली विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी के किसान सीताराम पटेल ने आधुनिक खेती को अपनाकर अपनी आय में बड़ा बदलाव किया है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से उन्होंने सीमित क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी हासिल की है।

धान की खेती से कम लाभ मिलने पर अपनाई नई तकनीक 

किसान सीताराम पटेल बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। इसमें खाद, दवा और मजदूरी पर खर्च अधिक होता था, लेकिन मेहनत के अनुसार आमदनी नहीं मिल पाती थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और अधिकारियों की सलाह पर आधुनिक सब्जी उत्पादन की ओर कदम बढ़ाया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। इस दौरान उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इससे पानी की बचत हुई, खरपतवार पर नियंत्रण आसान हुआ और पौधों की वृद्धि बेहतर हुई। 

धान की तुलना में कई गुना बढ़ा उत्पादन 

सीताराम पटेल के अनुसार, पहले धान की खेती में प्रति एकड़ करीब 18 क्विंटल उत्पादन मिलता था। वहीं ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उन्हें लगभग 300 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त हुआ। इस बदलाव ने उनकी खेती को अधिक लाभकारी बना दिया। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई।

मंडियों में मिला अच्छा भाव, लाखों का हुआ फायदा 

किसान ने अपनी उपज सरायपाली और ओडिशा की विभिन्न मंडियों में बेची। यहां उन्हें करीब 31 रुपये प्रति किलोग्राम तक का अच्छा बाजार भाव मिला। खेती में प्रति एकड़ लगभग 18 हजार रुपये बीज और अन्य सामग्री पर, 7 हजार रुपये मजदूरी पर तथा अन्य खर्च मिलाकर कुल करीब 30,800 रुपये की लागत आई। कम लागत और बेहतर उत्पादन के चलते उन्हें लगभग 3 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह आमदनी पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक रही। 

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा 

सीताराम पटेल की सफलता से ग्राम पंडरीपानी और आसपास के क्षेत्रों के किसान भी आधुनिक उद्यानिकी फसलों और नई कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। किसान का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर कम जमीन में भी बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
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