Sugar Stocks Crash: एथनॉल बैन पर सरकार के फैसले का असर, शुगर कंपनियों के शेयर 7% तक गिरे, 2026-26 सप्लाई ईयर के दौरान चीनी को एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेताल नही करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से चीनी मिलों की उत्पादन रणनीति और कमाई पर असर पड़ने की आशंका है। सरकार इस फैसले से चीनी मिलों के पास गन्ने और मोलासेस के इस्तेमाल को लेकर जैसी स्वतंत्रता नही रहेगी, मिलों के लिए बाजार की मांग संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है।
प्रमुख उत्पादन को लेकर बनी चिंताओं ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बना दिया है।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की मांग बढ़ने की संभावना
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है, दशहर और दिवाली जैसे त्योंहाराें के दौरान मिठाइयों, बिस्किट और अन्य कन्फेक्शनरी उत्पादों की मांग में तेजी आती है। त्योहारी सीजन से पहले स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है, ये नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 से लागू रहेंगे।
वैश्विक बाजार में चानी की सप्लाई को लेकर चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है, दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादन देशों में मौसम की परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आंशका है। यूरोप और ब्रिटेन में हीटवेव तथा उत्पादन का अनुमान 14.98 मिलियन टन रखा गया है। जबकि थाईलैंड ने उत्पादन अनुमान 15.6% घटाकर 9.5 मिलियन टन कर दिया है।यूरोप में भी फसल कमजोर रहने की आशंका
यूराेप में मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण चीनी उत्पादन पर दबाव रहने की संभावना है। यूरोपीय संघ के अनुमान के मुताबिक, इस साल की फसल पांच साल के औसत से करीब 11% कम रह सकती है। यदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन उम्मीद से कम रहता है, तो वैश्विक बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।
शुगर कंपनियों के शेयरों पर आगे भी बनी रहेगी नजर
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार के कदम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन से जुड़ी अनिश्चितताएं, दोनों ही शुगर कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक ओर एथनॉल उत्पादन पर लगी पाबंदी से मिलों की कमाई और निवेश पर असर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई कम होने की आशंका कीमतों को सहारा दे सकती है।







