ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास बुधवार रात हुए एक अमेरिकी सैन्य एक्शन में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न केवल खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी उबाल ला दिया है।
कैसे और कहाँ हुआ हमला?
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने पालाऊ (Palau) के ध्वज वाले एक तेल टैंकर 'एमटी सेट्टेबेलो' (MT Settebello) पर बुधवार रात को बड़ी कार्रवाई की।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा: अमेरिकी सेना का कहना है कि यह जहाज नियमों को ताक पर रखकर ईरानी तेल ले जा रहा था और अमेरिका द्वारा लगाई गई आर्थिक नाकाबंदी (Blockade) का सीधे तौर पर उल्लंघन कर रहा था।
हमले की तीव्रता: कार्रवाई के दौरान जहाज के इंजन रूम को सीधे निशाना बनाया गया। हमले के तुरंत बाद जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे वह समुद्र के बीचों-बीच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
क्रू मेंबर्स की स्थिति और हताहतों का विवरण
क्षतिग्रस्त हुए इस तेल टैंकर पर कुल 28 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 24 नागरिक भारतीय थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन: हमले के बाद चले आपातकालीन बचाव अभियान में 21 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
3 भारतीयों की मौत: शुरुआत में तीन भारतीय नाविक लापता बताए जा रहे थे, लेकिन ताजा अपडेट के अनुसार अब उनकी मौत की पुष्टि हो चुकी है।
मृतकों की पहचान: मृतकों में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के रहने वाले चीफ इंजीनियर पत्नाला सुरेश भी शामिल हैं। उनके परिवार में इस खबर के बाद से कोहराम मचा हुआ है। अन्य दो मृत नाविकों की पहचान सुनिश्चित करके संबंधित एजेंसियां उनके परिवारों को सूचित कर रही हैं।
🇮🇳 भारत का कड़ा रुख: अमेरिकी राजदूत तलब
इस दुखद घटना पर भारत सरकार ने बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने देर न करते हुए अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब (Summon) किया और इस कार्रवाई पर भारत का औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय का बयान: > "एक कमर्शियल (वाणिज्यिक) जहाज पर इस तरह का हमला बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और निर्दोष नाविकों की जान जाना कतई स्वीकार्य नहीं है।"
कूटनीतिक हलचल और राहत कार्य
वर्तमान में भारत सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है—पहला कूटनीतिक दबाव और दूसरा अपने नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी।
स्थानीय प्रशासन से संपर्क: ओमान स्थित भारतीय दूतावास लगातार ओमान प्रशासन और स्थानीय तटीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए है।
बचाए गए नाविकों की मदद: सुरक्षित बचाए गए 21 भारतीय नाविकों को चिकित्सा सहायता, भोजन और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। जल्द ही उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर बड़ा संकट
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक और सैन्य तनाव अपने चरम पर है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी (International Shipping) को गहरे संकट में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मार्ग में ऐसी घटनाओं से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
