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Falling tomato prices lead to increased distress (Image Source: Social Media)
Falling tomato prices lead to increased distress (Image Source: Social Media)
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Tomato Price: एक हफ्ते में 65% सस्ता हुआ टमाटर, किसानों की बढ़ी चिंता

Tomato Price: महाराष्ट्र के नासिक जिले पिपंलगांव थोक बाजार में टमाटर एक सप्ताह के भीतर 65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, अधिक आवक और कमजोर मांग के कारण 20 किलो टमाटर की क्रेट का औसत थोक भाव घटकर 111 रुपए रह गया है।

रोशनी पटेल | कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 21 Oct 2026, 11:03 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Tomato Price: महाराष्ट्र के नासिक जिले पिपंलगांव थोक बाजार में टमाटर एक सप्ताह के भीतर 65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, अधिक आवक और कमजोर मांग के कारण 20 किलो टमाटर की क्रेट का औसत थोक भाव घटकर 111 रुपए रह गया है। किमतों में आई इस गिरावट ने सूखे की मार झेल रहे किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। पिंपलगांव कृषि उपज बाजार समिति (APMC) में टमाटर के दाम गिरने का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है, नासिक में सोमवार को टमाटर करीब 20 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। 

एक सप्ताह में 321 रुपए से घटकर 111 रुपए हुई क्रेट

मंडी के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अक्टूबर को 20 किलो टमाटर की एक क्रेट का औसत थोक भाव 321 रुपए था। सोमवार तक यह घटकर 111 रुपए पर पहुंच गया, यानि प्रति क्रेट किसानों को मिलने वाली कीमत में 210 रुपए की कमी आई है। 

रोजाना पहुंच रहीं लाखों क्रेट, मांग कमजोर

APMC अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह से मंडी में प्रतिदिन करीब 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट टमाटर पहुंच रहे हैं। बाजार में लगातार बढ़ रही आवक के मुकाबले मांग कमजोर बनी हुई है। इसी असंतुलन के कारण थोक कीमतों पर दबाव बढ़ा है और किसानों को अपनी उपज के अपेक्षित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। 

गर्मी के कारण जल्दी पक रही फसल

व्यापारियों ने टमाटर की बढ़ती आवक के पीछे सामान्य से अधिक तापमान को एक प्रमुख कारण बताया है। गर्मी के कारण फसल तेजी से पक रही है, जिससे कम समय में बड़ी मात्रा में टमाटर मंडियों तक पहुंच रहे हैं। जब एक साथ अधिक उपज बाजार में आती है और खरीदारों की मांग उसी अनुपात में नहीं बढ़ती, तो कीमतों में गिरावट होना स्वाभाविक है। 

नवरात्र में कमजोर मांग ने बढ़ाया दबाव

मंडी अधिकारियों के मुताबिक, नवरात्र के दौरान कारोबार में सुस्ती और कमजोर निर्यात मांग का भी कीमतों पर असर पड़ा। इस अवधि में कई थोक बाजारों में कारोबार प्रभावित रहने से टमाटर की खपत और बिक्री पर दबाव बना। अधिक आवक के साथ मांग कमजोर रहने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम कीमत स्वीकार करनी पड़ रही है। 

किसानों के सामने लागत निकालने की चुनौती

टमाटर की कीमतों में तेज गिरावट और सूखे की स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ खेती के लिए खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मंडी में उपज का भाव लगातार नीचे जा रहा है। 
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