मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में रविवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। भोपाल के पास ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई। सरकार इस ऐतिहासिक कानून को कल यानी 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने जा रही है। इस फैसले के साथ ही राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
रविवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में केवल समान नागरिक संहिता ही नहीं, बल्कि राज्य के विकास से जुड़े कई अन्य अहम फैसले भी लिए गए। सरकार ने नए श्रम संहिता (लेबर कोड), निजी विश्वविद्यालय संशोधन और नागरिक सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रदेश की 71 स्वास्थ्य संस्थाओं के अपग्रेडेशन को मंजूरी दी गई। साथ ही, जबलपुर स्थित एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन करके एक नया मुख्यालय उज्जैन में बनाने का बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर को नया पर्यटन केंद्र बनाने की योजना पर भी मुहर लगी।
कानून को लेकर चल रही थी लंबी तैयारी
समान नागरिक संहिता को लेकर मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से तैयारी कर रही थी। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था, जिसने आम जनता और विभिन्न संगठनों से सुझाव मांगे थे। देश में उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना था जिसने इस कानून को अपने यहां पास किया था, जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस दिशा में कदम आगे बढ़ाए। सरकार का तर्क है कि इस कानून के आने से अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ की जगह एक ही सिविल कानून प्रभावी होगा, जिससे कानूनी पेचीदगियां खत्म होंगी।
राम और रहीम सबके लिए एक जैसा कानून
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देना है। अब राम और रहीम सबके लिए एक जैसा कानून होगा।" मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि इस कानून के दायरे से आदिवासी समाज को पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस से भी अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में विधानसभा के मानसून सत्र में इस विधेयक का खुलकर समर्थन करें।
लिव-इन और विवाह के नियमों में बदलाव
इस नए कानून के लागू होने से मध्य प्रदेश के सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने पर बड़ा असर पड़ेगा, खासकर लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति के अधिकारों को लेकर। नए नियमों के तहत अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा, ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। हालांकि, लिव-इन से पैदा होने वाले बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूरा अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, अब मौखिक रूप से तलाक देना पूरी तरह अमान्य होगा और हर नागरिक को कानूनी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। इस फैसले से महिलाओं के कानूनी अधिकारों को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।