छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में 8 मई से 1 जून के बीच महज 25 दिनों में 4 हाथी शावकों की मौत के मामले ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। लगातार हो रही इन मौतों के बाद पूरे क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच रिपोर्ट में अहम तथ्य सामने आए हैं। एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (लिवर संक्रमण) और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया (गंभीर रक्त संक्रमण) के कारण हुई है। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि भी हो चुकी है। इन रिपोर्टों ने स्पष्ट किया है कि शावकों की मौत किसी एक वजह से नहीं, बल्कि अलग-अलग संक्रमणों के कारण हुई है।
पोस्टमॉर्टम के बाद लैब जांच से हुआ खुलासा
विशेषज्ञों की कार्यशाला में सुरक्षा पर मंथन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग द्वारा एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हाथियों की मौत के कारणों, बचाव उपायों और निगरानी प्रणाली पर चर्चा की गई। इसमें विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया और महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने हाथियों में होने वाली बीमारियों, उनके कारणों और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। रायगढ़ समेत अन्य वन मंडलों के अधिकारी और कर्मचारियों को हाथी संरक्षण, स्वास्थ्य जांच और निगरानी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
वन मंडलों में 137 हाथियों की मौजूदगी
डीएफओ का बयान
डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सभी मामलों की जांच वैज्ञानिकों की मौजूदगी में कराई गई है और रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है और निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
इसी बीच छाल वन परिक्षेत्र से एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हाथी शावक की तालाब के दलदल में फंसकर मौत हो गई। वायरल वीडियो में हथिनी अपने मृत शावक को सूंड और पैरों से उठाने की कोशिश करती नजर आती है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है।
