Wednesday, 10 Jun 2026 भारत
W 𝕏 f
होम रायगढ़ बढ़ी चिंता : छत्तीसगढ़ में हाथी शावकों की रहस्यमय…
25 दिन में 4 हाथी शावकों की मौत
25 दिन में 4 हाथी शावकों की मौत
रायगढ़

बढ़ी चिंता : छत्तीसगढ़ में हाथी शावकों की रहस्यमयी मौत का खुलासा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में 25 दिनों के भीतर 4 हाथी शावकों की मौत से वन विभाग में चिंता बढ़ गई है। जांच रिपोर्ट में दो शावकों की मौत हेपेटाइटिस (लिवर संक्रमण) और सेप्टिसीमिया (रक्त संक्रमण) से होने की पुष्टि हुई है, जबकि एक की मौत निमोनिया से हुई थी।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
09 Jun 2026, 04:26 PM
रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में 8 मई से 1 जून के बीच महज 25 दिनों में 4 हाथी शावकों की मौत के मामले ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। लगातार हो रही इन मौतों के बाद पूरे क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच रिपोर्ट में अहम तथ्य सामने आए हैं। एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (लिवर संक्रमण) और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया (गंभीर रक्त संक्रमण) के कारण हुई है। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि भी हो चुकी है। इन रिपोर्टों ने स्पष्ट किया है कि शावकों की मौत किसी एक वजह से नहीं, बल्कि अलग-अलग संक्रमणों के कारण हुई है।

पोस्टमॉर्टम के बाद लैब जांच से हुआ खुलासा

वन विभाग ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम कराया था। इसके बाद सैंपल जांच के लिए देहरादून और बरेली स्थित प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। वहीं से आई रिपोर्ट के आधार पर शावकों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हुई। एक ही हाथी दल के शावकों की लगातार मौत और कई शवों का तालाबों व जलस्रोतों के पास मिलना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जांच में यह भी सामने आया कि सभी मृत शावक एक ही हाथी दल से संबंधित थे, जो संक्रमण से प्रभावित पाए गए।

 विशेषज्ञों की कार्यशाला में सुरक्षा पर मंथन

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग द्वारा एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हाथियों की मौत के कारणों, बचाव उपायों और निगरानी प्रणाली पर चर्चा की गई। इसमें विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया और महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने हाथियों में होने वाली बीमारियों, उनके कारणों और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। रायगढ़ समेत अन्य वन मंडलों के अधिकारी और कर्मचारियों को हाथी संरक्षण, स्वास्थ्य जांच और निगरानी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

वन मंडलों में 137 हाथियों की मौजूदगी

रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों में वर्तमान में कुल 137 हाथी मौजूद हैं, जिनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। हाल की घटनाओं के बाद शावकों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग की टीम, ट्रैकर्स और हाथी मित्र दल लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। ड्रोन कैमरों और ट्रैप कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है। रात के समय थर्मल ड्रोन से हाथियों की लोकेशन और मूवमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सके।

 डीएफओ का बयान 

डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सभी मामलों की जांच वैज्ञानिकों की मौजूदगी में कराई गई है और रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है और निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।

इसी बीच छाल वन परिक्षेत्र से एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हाथी शावक की तालाब के दलदल में फंसकर मौत हो गई। वायरल वीडियो में हथिनी अपने मृत शावक को सूंड और पैरों से उठाने की कोशिश करती नजर आती है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है।

क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
भारत
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
विदेश
राजनीति
मनोरंजन
खेल
तकनीक
कारोबार
शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल
कलमकार
आयोजन
डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें