छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने बालोद जिले के आठ प्राचार्यों के निलंबन के विरोध में रायपुर में आपात बैठक आयोजित की। बैठक में फेडरेशन के पदाधिकारियों और विभिन्न जिलों से पहुंचे प्राचार्यों ने कलेक्टर बालोद की कार्रवाई को एकतरफा, नियमों के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। संगठन ने साफ कहा कि यदि निलंबन आदेश जल्द वापस नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
परीक्षा परिणाम को निलंबन का आधार बनाने पर सवाल
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि केवल बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणाम को आधार बनाकर किसी प्राचार्य को “गंभीर कदाचार” का दोषी मानना उचित नहीं है। उनका तर्क था कि किसी भी स्कूल का परीक्षा परिणाम कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। विद्यार्थियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों की उपलब्धता और स्थानीय वातावरण जैसे कई कारक रिजल्ट को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी केवल प्राचार्य पर डालना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
अधिकार क्षेत्र और सेवा नियमों पर उठे सवाल
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्राचार्यों की नियुक्ति और प्रशासनिक नियंत्रण शासन स्तर पर होता है, तो निलंबन जैसी कार्रवाई भी शासन स्तर से ही की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा सीधे निलंबन आदेश जारी करना सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं लगता।
सरकार से बहाली की मांग
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिव से मुलाकात करेगा। इस दौरान निलंबन आदेश को निरस्त करने और सभी प्राचार्यों को तत्काल बहाल करने की मांग रखी जाएगी। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन, धरना और चरणबद्ध आंदोलन किए जाएंगे। संगठन के नेताओं ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से शिक्षकों और प्राचार्यों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है, जिसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
बैठक में मौजूद रहे पदाधिकारी
बैठक में संगठन के संरक्षक कमल वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष एम.आर. खान, अनुराग ओझा और धर्मेंद्र सिंह ठाकुर सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
