Wednesday, 04 Nov 2026 भारत
W 𝕏 f
होम › छत्तीसगढ़ › करोड़ों संतानों की एक ही मां : घुचापाली की वह मां…
मां के आंगन में उमडी उनके संतानों की भीड़
मां के आंगन में उमडी उनके संतानों की भीड़
छत्तीसगढ़ Featured

करोड़ों संतानों की एक ही मां : घुचापाली की वह मां जिनके चरणों में पनपता है विश्वास, वात्सल्य और वरदान

मदर्स डे सिर्फ सांसारिक मां के वात्सल्य को नमन करने का दिन नहीं, उस आदि शक्ति को स्मरण करने का अवसर भी है, जो समस्त सृष्टि की जननी हैं। मदर्स डे के अवसर पर प्रस्तुत यह विशेष फीचर महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित घुचापाली पहाड़ी पर विराजित मां चंडी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन है। लोकआस्था का केंद्र हैं। प्राकृतिक पाषाण स्वरूप में विराजी मां की गोद में हरियाली, अथाह जल, शिलाएं और सुख-समृद्धि का विस्तार भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव देता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की वह सार्वभौमिक मां हैं, जो बिना भेदभाव सभी की प्रार्थनाएं सुनती हैं, कष्ट हरती हैं और अपनी ममता से सबको आच्छादित करती हैं। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मां के स्नेह और शक्ति का साक्षात अनुभव करता है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 10 May 2026, 01:11 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:35 AM
बागबाहरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मां... यह एक ऐसा शब्द है, जिसमें संसार का समूचा स्नेह, सुरक्षा और समर्पण समाहित है। जन्म देने वाली मां की तरह ही भारतीय आस्था में देवी को भी मां कहकर पुकारा जाता है। वह मां जो अपने हर बच्चे की पुकार सुनती है, बिना किसी भेदभाव के सब पर कृपा बरसाती है। मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर जब दुनिया अपनी-अपनी माताओं के प्रति सम्मान व्यक्त कर रही है, तब महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र की घुचापाली पहाड़ी पर विराजित मां चंडी करोड़ों संतानों की उस सार्वभौमिक मां के रूप में याद की जा रही हैं, जिनके चरणों में विश्वास, वात्सल्य और वरदान का अनंत संसार बसता है।

घुचापाली की शांत और हरित पहाड़ी पर प्राकृतिक पाषाण रूप में विराजमान मां चंडी का यह धाम एक मंदिर के साथ लोकआस्था का जीवंत केंद्र है। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होता है मानो मां ने अपनी विशाल गोद में उन्हें समेट लिया हो। ऊंचे वृक्ष, विशाल शिलाएं, पहाड़ी की गोद में बहता अथाह जल और चारों ओर फैली शांति इस स्थल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। मान्यता है कि मां चंडी यहां स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थीं और तभी से यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार मां चंडी संकटों का निवारण करने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी हैं। जो भी सच्चे मन से यहां अपनी प्रार्थना लेकर आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता। कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है, कोई रोगमुक्ति की, कोई रोजगार और समृद्धि की मां सबकी सुनती हैं। उनके दरबार में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, जाति-धर्म का कोई भेद नहीं। यहां हर श्रद्धालु केवल मां का बच्चा बनकर आता है।

मां चंडी का यह धाम प्रकृति और अध्यात्म के अद्भुत संगम का प्रतीक है। ऐसा लगता है जैसे मां ने अपने आंचल में मनुष्यों को ही नहीं, पेड़-पौधों, पत्थरों, जलधाराओं और जीव-जंतुओं को भी सहेज रखा है। पहाड़ी की हरियाली और वहां की निर्मल जलधाराएं इस बात का प्रतीक हैं कि मां केवल कृपा ही नहीं, जीवन का विस्तार भी देती हैं। यही कारण है कि यहां पहुंचकर लोगों को केवल धार्मिक शांति ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक सुकून भी मिलता है।

नवरात्रि और विशेष पर्वों के दौरान यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है, लेकिन सामान्य दिनों में भी रोजाना हजारों लोग मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कोई माथा टेकने आता है, कोई धन्यवाद देने, तो कोई केवल मां की गोद में कुछ क्षण बिताने। मंदिर परिसर में गूंजती घंटियों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की आस्था वातावरण को ऐसा बना देती है, जहां हर व्यक्ति अपने भीतर एक नई शक्ति महसूस करता है।

मदर्स डे हमें अपनी जन्मदात्री मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है, लेकिन यह दिन हमें उस दिव्य मां को याद करने की भी प्रेरणा देता है, जो संपूर्ण सृष्टि की जननी है। घुचापाली की मां चंडी ऐसी ही मां हैं, जो हर दुख में संबल देती हैं, हर भय में साहस देती हैं और हर निराशा में आशा का दीप जलाती हैं।

आज जब संसार भौतिक उपलब्धियों के पीछे भाग रहा है, तब मां चंडी का यह धाम हमें याद दिलाता है कि सच्चा सुख मां के चरणों में मिलने वाली शांति और विश्वास में छिपा है। करोड़ों लोगों की यह मां आज भी उसी ममता से अपने आंचल को फैलाए खड़ी हैं, बस जरूरत है श्रद्धा से उनके पास जाने की। घुचापाली की मां चंडी इसी शाश्वत मातृत्व की जीवंत अनुभूति हैं। करोड़ों संतानों की वह मां, जिनकी गोद में आज भी आस्था, आशा और सुख-समृद्धि पल रही है।

मदर्स डे पर मां चंडी के चरणों में यही प्रार्थना कि - हे जगत जननी, अपनी हर संतान पर यूं ही स्नेह बरसाती रहो।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें