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एजेंसी संचालक और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी
एजेंसी संचालक और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी
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गैस घोटाला :  डेढ़ करोड़ की LPG चोरी मामले में  भाजपा का प्रदेश पदाधिकारी पंकज चंद्राकर गिरफ्तार

1.5 करोड़ रुपए के LPG गैस चोरी कांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, मनीष चौधरी और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर ने सुनियोजित साजिश के तहत 90 मीट्रिक टन LPG से भरे 6 गैस कैप्सूल अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दिए। दिसंबर 2025 में दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस ने सभी गाड़ियों को जब्त किया था। मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है, जबकि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
09 May 2026, 12:24 PM
📍 महासमुंद

छत्तीसगढ़ के ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 1.5 करोड़ रुपए की LPG गैस चुराई। दिसंबर 2025 में पुलिस ने 90 मीट्रिक टन LPG ले जा रही 6 गैस कैप्सूल गाड़ियों को जब्त किया था। लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होने के कारण सभी गाड़ियां थाने में खड़ी कर दी गई। अब पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों अजय यादव ( जिला खाद्य अधिकारी), मनीष चौधरी और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर  को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे पूछताछ चल रही है। ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।

प्लानिंग के साथ 6 गैस कैप्सूल किए 'हैंडओवर'

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि, खाद्य अधिकारी अजय यादव, मनीष चौधरी, गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने एक सोची-समझी साजिश रची थी। इन्होंने गैस से भरे 6 बड़े कैप्सूल (टैंकर) को सीधे अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल को सौंप दिया। बाजार में इस गैस की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। 

ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक फरार

पुलिस को इस पूरे खेल में अभनपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालकों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं। हालांकि, पुलिस की दबिश से पहले ही फर्म के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

अब जानिए पूरा मामला

 जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए, इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा। इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए। इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा। खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को ये 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए। संतोष अपने स्टाफ की मदद से सभी गाड़ियां सिंघोड़ा थाना से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।

कंपनी के मालिक ने गैस बेचने की प्लानिंग की

 हैंडओवर के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर (56), डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने गैस को अवैध रूप से बेचने की प्लानिंग की। सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे (वजन करने की जगह) होने के बावजूद कहीं भी वजन नहीं कराया गया। सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग में खड़ा कर दिया गया। इसके बाद 5 गाड़ियों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।

 8 दिनों में प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली किया गैस

 इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया। इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय क्षमता से ज्यादा थी। इसके बाद रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई। वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी। इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन को बताया कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया। 

 दस्तावेज में जितनी गैस खरीदी उससे 3 गुना बेची

 जब्त दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।

कंपनी का स्टाफ गिरफ्तार, मालिक डायरेक्टर फरार

इससे पहले पुलिस ने कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव (41) को गिरफ्तार किया था, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांट मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई दस्तावेज जब्त किए थे।

सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश

जांच में यह भी पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफिस में आरोपियों ने सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की। प्लांट के गेट पर जो वाहनों की एंट्री-एग्जिट और खरीद-बिक्री का रजिस्टर रखा जाता था, उससे अवैध लेन-देन करने वाली गाड़ियों और एजेंसियों की पहचान हो सकती थी। इसी तरह ऑफिस में बिना बिल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भी रखा जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रजिस्टर ही गायब कर दिया गया। जब जांच के दौरान आरोपियों को बुलाया गया, तो उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की। इसी आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

 गिरफ्तारी से राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप

महासमुंद के चर्चित एलपीजी गैस घोटाले में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंकज चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पुलिस जांच में उन पर गैस कैप्सूलों को अवैध रूप से ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स तक पहुंचाने और पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। महासमुंद जिले में सामने आए करीब डेढ़ करोड़ रुपए के एलपीजी गैस घोटाले में भाजपा नेता पंकज चंद्राकर की गिरफ्तारी ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। पंकज चंद्राकर भाजपा के जिला और राज्य पदाधिकारियों के करीबी नेताओं में गिना जाता है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने के नाम पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स भेजा गया, जहां बड़ी मात्रा में एलपीजी गैस को अवैध तरीके से निकालकर बेच दिया गया।

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