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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा

ग्रीन गोल्ड : हर्बल समृद्धि से आत्मनिर्भरता की ओर, वन संपदा से समृद्धि की नई कहानी

छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से “हर्बल स्टेट” के रूप में नई पहचान बना रहा है। तेंदूपत्ता, बांस, लाख, शहद और औषधीय पौधों जैसे वनोपज, जिन्हें “ग्रीन गोल्ड” कहा जाता है, राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। जामगांव की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई और “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाया जा रहा है। आधुनिक प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भंडारण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने इन उत्पादों की मांग को बढ़ाया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 10 May 2026, 11:16 AM · अपडेट: 25 May 2026, 11:30 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़, जिसे हर्बल स्टेट के रूप में जाना जाता है, आज अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी शासकीय नीतियों के बल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है। यहाँ के वनों से प्राप्त होने वाला ग्रीन गोल्ड अब केवल स्थानीय उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में अपनी चमक बिखेर रहा है। छत्तीसगढ़ की यह पहल न केवल वनों का संरक्षण कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में स्वावलंबन, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की नई चेतना का संचार भी कर रही है।

 वनों की असली पूँजी

छत्तीसगढ़ में वनोपज को “हरा सोना” कहा जाता है, जो राज्य की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। तेंदूपत्ता और बांस अपनी बहुउपयोगिता के कारण प्रमुख वनोपज हैं। इसके अतिरिक्त लाख, शहद और दुर्लभ औषधीय पौधों के साथ-साथ सागौन, साल, बीजा और शीशम जैसे कीमती वृक्ष भी यहाँ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों के माध्यम से इन कच्चे उत्पादों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित किया जा रहा है।

 वनोपज अर्थव्यवस्था का पावरहाउस

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा लोकार्पित जामगांव की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान कर रही है। यहाँ आंवला, बेल, गिलोय और अश्वगंधा जैसे उत्पादों को जूस, कैंडी और हर्बल पाउडर में बदला जाता है। इस इकाई में 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले अत्याधुनिक वैज्ञानिक गोदाम बनाए गए हैं, जो वनोपज को सुरक्षित रखने के साथ-साथ संग्राहकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।

 स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान

राज्य सरकार का आधिकारिक ब्रांड “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” अब शुद्धता और प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है। पहले जहाँ संजीवनी स्टोरों की संख्या केवल 30 थी, वहीं अब यह बढ़कर 1,500 से अधिक हो गई है।ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ये उत्पाद अब अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइटों पर भी उपलब्ध हैं। इस ब्रांड के प्रमुख उत्पादों में भृंगराज तेल, नीम तेल, च्यवनप्राश, शुद्ध शहद, महुआ उत्पाद, बेल शर्बत तथा विभिन्न आयुर्वेदिक चूर्ण शामिल हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव

इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएँ मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण और पैकेजिंग जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आई है तथा परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मॉडल आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।

 भविष्य की नई दिशा

भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 में स्थापित हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट ने छत्तीसगढ़ को हर्बल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में नई पहचान दी है। यहाँ औषधीय पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले अर्क तैयार किए जाते हैं, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और वेलनेस इंडस्ट्री में भारी मांग है।अब छत्तीसगढ़ केवल कच्चा माल उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि परिष्कृत और मूल्यवर्धित हर्बल उत्पादों का प्रमुख निर्माता बनकर उभर रहा है।

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