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बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ का बड़ा अभियान
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बाल विवाह पर रोक : बेटियों के सम्मान का अभियान बना जनआंदोलन, बाल विवाह मुक्त हो रहा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान सामाजिक बदलाव की मजबूत मिसाल बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू इस अभियान के तहत गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर बाल विवाह जैसी कुरीति पर रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक राज्य की 64 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
16 May 2026, 11:32 AM
📍 रायपुर

छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान अब सामाजिक परिवर्तन की मजबूत मिसाल बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस पहल को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का व्यापक अभियान बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहयोग के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। सरकार का मानना है कि शिक्षित और सुरक्षित बेटियां ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेंगी।

जमीनी स्तर पर चल रही व्यापक जागरूकता

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार गांवों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं। यही वजह है कि यह अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी की गई है।

64 प्रतिशत पंचायतें पहले ही हुईं बाल विवाह मुक्त

अभियान की प्रगति उत्साहजनक रही है। 31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय भी इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष फोकस

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब बेटियां शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है, ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।

राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में छत्तीसगढ़ मॉडल

पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।

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