सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर हादसे के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 घायल मजदूरों का इलाज जारी है। पुलिस अधीक्षक IPS प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 दर्ज किया गया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है।
मशीनों के रखरखाव में भारी लापरवाही
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट में मशीनों के रखरखाव और संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई। वेदांता कंपनी और एनजीएसएल (NGSL) द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे बॉयलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव आया और विस्फोट हो गया। जांच एजेंसियों के अनुसार उपकरणों की समय पर जांच और मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ, जिसे रोका जा सकता था।
जांच के लिए विशेष टीम गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की है। टीम में एसडीओपी सुमित गुप्ता, फोरेंसिक अधिकारी सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी डभरा राजेश पटेल शामिल हैं। यह टीम तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच कर रही है, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारों की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
मृतकों के परिजनों को मुआवजा
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने मृतक मजदूरों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही, प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।
जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने भी घटना को लेकर आक्रोश जताया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।