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सड़क और पुल की मांग को लेकर हाई कोर्ट पहुंचे ग्रामीण
सड़क और पुल की मांग को लेकर हाई कोर्ट पहुंचे ग्रामीण
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हाई कोर्ट के दरवाजे पर : हर बारिश में थम जाती है गांव की जिंदगी, मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के परसापानी और बंगला भाटा गांवों में सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। ग्रामीणों ने याचिका दायर कर बताया कि बारिश के मौसम में गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती-बाड़ी प्रभावित होती है। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और सरकार से जवाब तलब किया है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
12 May 2026, 04:48 PM
📍 बिलासपुर

आजादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। अब बिलासपुर जिले के दो गांवों — परसापानी और बंगला भाटा — के ग्रामीणों की सड़क और पुल की मांग हाई कोर्ट तक पहुंच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मुद्दे को ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला मानते हुए सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। 

याचिका में बताया गया है कि परसापानी और बंगला भाटा गांव बिलासपुर-मरवाही बाईपास रोड के बेहद करीब स्थित हैं, लेकिन आज तक इन गांवों को हर मौसम में उपयोग होने वाली सड़क सुविधा नहीं मिल सकी है। गांव के बीच बहने वाले पहाड़ी नाले पर पक्का पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। मानसून के दौरान लगभग दो से तीन महीने तक गांव पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। 

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में नाले का जलस्तर बढ़ने से लोगों का आना-जाना बंद हो जाता है। ऐसे समय में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, बच्चों का स्कूल जाना और किसानों का बाजार तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर पड़ रहा असर

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सड़क और पुल के अभाव का सीधा असर ग्रामीणों के जीवन स्तर पर पड़ रहा है। गांव के लोग समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं ले पा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है क्योंकि बारिश के मौसम में स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

किसानों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ता है। सड़क नहीं होने के कारण वे अपनी कृषि उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाते, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दशकों से प्रशासन की अनदेखी के कारण इन गांवों का विकास रुक गया है।

कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों ने अदालत को बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को आवेदन देकर सड़क और पुल निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अधिकारियों की लगातार उदासीनता के कारण ग्रामीणों को हर साल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से मांग की है कि वह अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए सरकार को गांवों में सड़क और पुल निर्माण के निर्देश दे, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक का निवासी है और उसने अपने क्षेत्र की सड़क समस्या को लेकर यह जनहित याचिका दायर की है।

 मामले की गंभीरता और बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के लोक निर्माण विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सरकार को बताना होगा कि आखिर इतने वर्षों बाद भी इन गांवों तक सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाईं।

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