Thursday, 05 Nov 2026 भारत
"रेशम विभाग" के लिए 4 परिणाम मिले
Agricultural Development: महिला स्व-सहायता समूह की बड़ी सफलता, 733 किलो से अधिक ककून का उत्पादन
राज्य सरकार
Agricultural Development: महिला स्व-सहायता समूह की बड़ी सफलता, 733 किलो से अधिक ककून का उत्पादन
Agricultural Development: बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम ढाबाडीह के किसानों ने उन्नत बीज उत्पादन और अनुबंध खेती अपनाकर अपनी आय में 75% तक की बढ़ोतरी की है। 25 एकड़ में बीज उत्पादन के साथ किसानों को उद्यानिकी विभाग से दो क्रॉप सोलर ड्रायर भी मिले हैं।
सती दीवान | कीर्तिमान डेस्क 23 Oct 2026 2 मिनट पढ़ने का समय
Tasar Silk Farming: भूमिहीन मजदूर से बने कोसा उत्पादक, ललित गुप्ता की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
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Tasar Silk Farming: भूमिहीन मजदूर से बने कोसा उत्पादक, ललित गुप्ता की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
Tasar Silk Farming: रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के आमाघाट निवासी ललित गुप्ता ने टसर कृमिपालन और बीज निर्माण को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी। तीन वर्षों में करीब 4.50 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर उन्होंने बेटी का विवाह कराया, घर पक्का कराया और परिवार को आर्थिक मजबूती दी। वर्ष 2024-25 में 1.05 लाख टसर कोसा उत्पादन के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ टसर कोसा उत्पादक का सम्मान भी मिला।
कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू 20 Sep 2026 4 मिनट पढ़ने का समय
नई उड़ान : नारायणपुर बना रेशम उत्पादन का मॉडल, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा
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नई उड़ान : नारायणपुर बना रेशम उत्पादन का मॉडल, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा
नारायणपुर जिले में मलबरी और टसर रेशम योजनाएं ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बन रही हैं। महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय हितग्राहियों को रोजगार के साथ आर्थिक मजबूती मिल रही है। रेशम उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन के साथ जिला आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है।
कीर्तिमान डेस्क 21 Jul 2026
सिल्क समग्र 2 योजना से रेशम उत्पादन को बढ़ावा, 21 किसानों को मिला लाभ
सिल्क समग्र 2 योजना से रेशम उत्पादन को बढ़ावा, 21 किसानों को मिला लाभ
महासमुंद जिले में केंद्र प्रायोजित सिल्क समग्र 2 योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। योजना के तहत अब तक 21 किसानों का चयन कर शहतूत पौधरोपण कराया गया है। यह योजना 5 एकड़ से कम भूमि वाले छोटे एवं सीमांत किसानों को रेशम उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर देती है, जिसमें प्रति वर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय संभव है। किसानों को पौधरोपण, सिंचाई, कृमि पालन गृह निर्माण और उपकरणों के लिए कुल 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी शामिल है।
कीर्तिमान डेस्क 01 May 2026
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