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वनांचल में विकास की नई कहानी, रेशम उत्पादन से बढ़ी ग्रामीणों की आय
वनांचल में विकास की नई कहानी, रेशम उत्पादन से बढ़ी ग्रामीणों की आय
राज्य सरकार

नई उड़ान : नारायणपुर बना रेशम उत्पादन का मॉडल, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा

नारायणपुर जिले में मलबरी और टसर रेशम योजनाएं ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बन रही हैं। महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय हितग्राहियों को रोजगार के साथ आर्थिक मजबूती मिल रही है। रेशम उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन के साथ जिला आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 21 Jul 2026, 03:56 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 08:22 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर में रेशम विकास एवं विस्तार योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में एक स्वर्णिम बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। जिला प्रशासन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में संचालित मलबरी और टसर रेशम योजनाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खोले हैं, बल्कि महिलाओं और युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। आज नारायणपुर में रेशम उत्पादन केवल कृषि-सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

मलबरी रेशम से समूहों को आय

नारायणपुर और कुसरतराई में स्थित दो मलबरी केंद्रों में लगभग 22.5 एकड़ क्षेत्र में पौधारोपण विकसित किया गया है। यहाँ महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्य उन्नत तकनीकों
मलबरी-टसर रेशम से आत्मनिर्भर बन रहे नारायणपुर के ग्रामीण
से रेशम कृमिपालन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 4,400 किलोग्राम ककून उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 4,180 किलोग्राम का सफल उत्पादन हासिल किया गया। इस गतिविधि से जुड़े 47 हितग्राहियों के बैंक खातों में 7.72 लाख रूपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई। कृमिपालन के साथ-साथ पौधारोपण संरक्षण और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों ने ग्रामीणों को पूरे साल रोजगार से जोड़े रखा।

टसर रेशम ने बनाया नया रिकॉर्ड

​जिले के चार प्रमुख टसर केंद्रों—नारायणपुर, कुसरतराई, गोटाजुन्हरी और एडका के 62 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित टसर कृमिपालन ने इस वर्ष सफलता के नए आयाम छुए हैं। वर्ष 2025-26 में 8.52 लाख कोसाफल उत्पादन के लक्ष्य के मुकाबले 9.73 लाख से अधिक कोसाफल का बम्पर उत्पादन दर्ज किया गया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि से जुड़े 64 हितग्राहियों को लगभग 36.97 लाख रूपए की सीधी आय अर्जित हुई। ​रेशम विभाग द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ संसाधन ही नहीं, बल्कि सही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।कृमियों को बीमारियों से बचाने और गुणवत्तापूर्ण ककून तैयार करने के लिए सतत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।उत्पादन का सीधा और पारदर्शी भुगतान सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसी तरह स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने इस पूरी प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाकर अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को संवारा है।

नारायणपुर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

नारायणपुर का यह मॉडल यह साबित करता है कि यदि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी विकास और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है।​आने वाले समय में इन योजनाओं का विस्तार न केवल अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को गरीबी से बाहर निकालेगा, बल्कि नारायणपुर को राज्य के रेशम मानचित्र पर एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान भी दिलाएगा।
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