Chakradhar Samaroh: अनुराग शर्मा के लोकगीतों से गूंजा मंच, कथक और सूफी संगीत ने बांधा समां
Chakradhar Samaroh: रायगढ़ में आयोजित 41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, कथक नृत्य और सूफी संगीत की शानदार प्रस्तुतियों से यादगार बन गई। अनुराग शर्मा ने लोकगीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जबकि अनंता पांडेय, डॉ. खुशबू पांचाल और पद्मश्री डॉ. भारती बंधु की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक रंग बिखेरे।
Chakradhar Samaroh: रायगढ़ में आयोजित 41 वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़े लोकप्रिय गायक, संगीतकार एवं अभिनेता अनुराग शर्मा ने अपनी सुरीली आवाज से लोकसंगीत की मनमोहक छटा बिखेरी। छत्तीसगढ़ी बोली, लोकधुन और माटी की खुशबू से सजे एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति ने समारोह के मंच को जीवंत कर दिया।
अनुराग शर्मा के मधुर स्वरों के साथ दर्शक भी सुर और ताल में डूबे नजर आए। उनकी मधुर आवाज, भावपूर्ण गायन और छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की मिठास ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के साथ कई सुपरहिट हिंदी गाने भी गाए। उनके गीतों पर दर्शक तालियों के साथ झूमते हुए नजर आए।
गायन के साथ संगीत और अभिनय में भी बनाई पहचान
अनुराग शर्मा छत्तीसगढ़ी कला और संगीत जगत के बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं। गायन के साथ उन्होंने संगीत और अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अब तक उनकी 500 से अधिक लाइव प्रस्तुतियां हो चुकी हैं और उनके 1000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। फिल्म एवं एल्बम के लिए उन्हें 11 बार बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। अनुराग शर्मा ने छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत को देश के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी पहचान दिलाई है। उन्होंने अमेरिका के शिकागो में छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
अनुराग शर्मा के लोकगीतों से झूमे दर्शकचक्रधर समारोह में अनंता की शानदार कथक प्रस्तुति
41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवी सांस्कृतिक संध्या में युवा नृत्यांगना अनंता पांडेय ने कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने भाव, लय और ताल के साथ कथक नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। अनंता ने 8 वर्ष की उम्र से मंच पर नृत्य करना शुरू किया। थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नृत्य चौम्पियनशिप में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने पुरस्कार हासिल किए हैं। वर्ष 2019 में अनंता ने पांच बच्चों के साथ भवप्रीता डांस एकेडमी की शुरुआत की। वर्तमान में वे बच्चों को कथक, सेमी-क्लासिकल और वेस्टर्न डांस का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में अध्ययनरत हैं। नृत्य के क्षेत्र में उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
कथक की भाव-लय से गूंजा समारोह मंच
41वें चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में उज्जैन की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं नृत्य निर्देशक डॉ. खुशबू पांचाल ने अपनी शानदार कथक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में कथक की बारीकियों, भाव-भंगिमाओं, लय, ताल और पदसंचालन का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से कथक की शास्त्रीय गरिमा और भाव-सौंदर्य को प्रभावी ढंग से मंच पर साकार किया। सहज भावाभिव्यक्ति, आकर्षक पदचालन और लयकारी ने प्रस्तुति को विशेष बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
Image captionकथक परंपरा को आगे बढ़ा रहीं डॉ. खुशबू पांचाल
डॉ. खुशबू पांचाल पिछले तीन दशकों से कथक की साधना, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार से जुड़ी हैं। वे नृत्य साधना नृत्य मंदिर की संस्थापिका एवं निदेशिका तथा नृत्याराधना संगीत एवं कला महाविद्यालय, उज्जैन की प्राचार्य हैं। उन्होंने खजुराहो नृत्य समारोह, मोढेरा महोत्सव और अखिल भारतीय कालिदास समारोह सहित देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर कथक की प्रस्तुतियां दी हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर उनकी प्रस्तुति ने कथक की समृद्ध परंपरा, भाव, संगीत और लय की खूबसूरती को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने कलाकार का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया।
डॉ. भारती बंधु सूफी प्रस्तुतियों से यादगार बनी चक्रधर समारोह की रातभक्ति रस में डूबा चक्रधर समारोह का मंच
41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने सूफी संगीत, कबीर वाणी और भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। गणेश वंदना के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’ और ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’ जैसे भक्ति गीतों ने श्रोताओं को जोड़े रखा। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। भारती बंधु ने कबीर के दोहों और पदों को भी अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया। ‘कबीरा बिगड़ गयो राम दुहाई’, ‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के’, ‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’ और ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसे गीतों की प्रस्तुति हुई। कबीर की वाणी, सूफी संगीत और भक्ति गीतों की विविध प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या में संगीत की अलग-अलग परंपराओं का रंग देखने को मिला।
पांचवीं पीढ़ी से निभा रहे भक्ति संगीत की परंपरा
प्रस्तुति के दौरान डॉ. भारती बंधु ने चक्रधर समारोह से अपने पुराने जुड़ाव की बातें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि वे समारोह को उसके शुरुआती दौर से जानते हैं।उन्होंने कहा कि समय के साथ समारोह का स्वरूप काफी विस्तृत हुआ है और आज इसमें शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार में भक्ति संगीत की पांचवीं पीढ़ी से जुड़े हैं, जबकि उनके पुत्र छठी पीढ़ी के रूप में इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 67 वर्षीय भारती बंधु ने बताया कि वे पिछले 57 वर्षों से गायन कर रहे हैं।