छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में शुक्रवार को हुई एक अहम सुनवाई के दौरान भिलाई नगर निगम के एक डिप्टी कमिश्नर को अदालत की नाराजगी का सामना करना पड़ा। न्यायालय ने अधिकारी के अदालत में पेश होने के तरीके, देरी से पहुंचने और ड्रेसकोड को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय की गरिमा और अनुशासन का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
मामला भिलाई नगर निगम से जुड़ा हुआ था। सुनवाई शुरू होने पर अदालत को बताया गया कि नगर निगम आयुक्त किसी आवश्यक कारण से उपस्थित नहीं हो सके हैं और उनकी जगह डिप्टी कमिश्नर कोर्ट में पेश हुए हैं। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब पहले से सुनवाई की जानकारी थी, तब अधिकारी तय समय पर क्यों उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और अधिकारियों की लापरवाही के कारण सुनवाई प्रभावित हो रही है।
देरी और सूचना नहीं देने पर फटकार
अदालत ने अधिकारी से देरी का कारण पूछा और यह भी जानना चाहा कि कोर्ट को पहले से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अदालत की कार्यवाही को गंभीरता से लेना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालय में उपस्थित होने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है और उन्हें समय पालन के साथ आवश्यक औपचारिकताओं का पालन करना चाहिए।ड्रेसकोड को लेकर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब न्यायालय ने अधिकारी का पद पूछा और उन्होंने स्वयं को भिलाई नगर निगम का डिप्टी कमिश्नर बताया, तब कोर्ट ने उनके पहनावे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने सवाल किया कि क्या उन्हें हाई कोर्ट में अधिकारियों के लिए तय ड्रेसकोड और शिष्टाचार की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी बिना औपचारिक तैयारी और नियमों का पालन किए सीधे अदालत में पहुंच गए, जो न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने की दी जानकारी
इसके बाद न्यायालय ने अधिकारी से पूछा कि वे नियमित नियुक्ति से इस पद पर पहुंचे हैं या पदोन्नति के जरिए। जवाब में अधिकारी ने बताया कि वे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। इस पर कोर्ट ने उन्हें भविष्य में उचित ड्रेसकोड और अनुशासन के साथ अदालत में उपस्थित होने की हिदायत दी।
हाई कोर्ट ने अधिकारी को आवश्यक औपचारिकताओं का पालन करने और अगली पेशी में निर्धारित मानकों के अनुरूप उपस्थित होने के निर्देश दिए। इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई शुरू की गई। इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा न्यायालय परिसर और प्रशासनिक हलकों में होती रही।

