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1.67 लाख खाते से पार करने वाला आरोपी गिरफ्तार
1.67 लाख खाते से पार करने वाला आरोपी गिरफ्तार
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सेवा के नाम पर विश्वासघात : बीमार डॉक्टर के खाते से केयरटेकर ने उड़ाए लाखों रुपए

भिलाई (छत्तीसगढ़) में एक डॉक्टर दंपती के घर पर रखे गए केयरटेकर ने धोखाधड़ी की। उसने ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित मरीज की देखभाल के दौरान उनके मोबाइल तक पहुंच बनाकर UPI के जरिए करीब ₹1.67 लाख अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। बाद में बैंक स्टेटमेंट जांच में ठगी का पता चला और शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जिसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। यह मामला भरोसे और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी देता है, खासकर जब घर में बाहरी केयरटेकर या सहायक रखे जाते हैं।

कीर्तिमान न्यूज
10 May 2026, 01:21 PM
भिलाई

छत्तीसगढ़ के भिलाई से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने 'मानवता और भरोसे' पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालपुरी ए-ब्लॉक में रहने वाले एक प्रतिष्ठित डॉक्टर दंपती के घर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब उन्हें पता चला कि जिस केयरटेकर को उन्होंने बीमार बुजुर्ग की सेवा के लिए रखा था, उसी ने उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। आरोपी ने बीमार डॉक्टर की लाचारी का फायदा उठाते हुए उनके मोबाइल से ₹1.67 लाख अपने खाते में पार कर दिए।

बीमारी का फायदा और शातिर चाल

घटना की पृष्ठभूमि भावुक और परेशान करने वाली है। दरअसल, डॉ. पूर्णिमा राज कछवाहा, जो सीएमसी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं, उनके पति डॉ. एसके कछवाहा पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बीते 20 मार्च को डॉ. एसके कछवाहा को ब्रेन स्ट्रोक आया था, जिसके बाद वे लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो गए।

उनकी चौबीस घंटे देखभाल और सेवा के लिए परिवार ने 1 अप्रैल को तिरथ चौधरी उर्फ अन्नू नाम के युवक को बतौर केयरटेकर काम पर रखा था। परिवार को उम्मीद थी कि तिरथ उनके संकट के समय में मददगार साबित होगा, लेकिन उसकी नजरें डॉक्टर के बैंक बैलेंस पर टिकी थीं।

ऐसे खुला राज: गायब मोबाइल और बैंक स्टेटमेंट

आरोपी तिरथ दिनभर मरीज के साथ रहता था, जिससे उसे घर के कोने-कोने और डॉक्टर के मोबाइल फोन तक आसानी से पहुंच मिल गई थी। साजिश के तहत 5 मई को उसने डॉ. एसके कछवाहा का मोबाइल गायब कर दिया। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन फोन नहीं मिला। अगले दिन फोन रहस्यमयी तरीके से अलमारी के पास पड़ा मिला।

शक की सुई तब घूमी जब परिवार ने सावधानीवश ऑनलाइन वॉलेट और बैंक खाते की हिस्ट्री चेक की। बैंक स्टेटमेंट देखते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। महज दो दिनों के भीतर यूपीआई (UPI) के जरिए कई ट्रांजेक्शन किए गए थे, जिसमें कुल ₹1,67,000 की राशि गायब थी।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. पूर्णिमा ने 8 मई को भिलाई नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्य और बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल्स खंगालीं। सारे सबूत केयरटेकर तिरथ चौधरी की ओर इशारा कर रहे थे।

पुलिस ने जब तिरथ को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और बैंक से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

सीख: यह घटना हमें सचेत करती है कि घर में बाहरी सहायक या केयरटेकर रखते समय न केवल उनका पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा (जैसे मोबाइल पासवर्ड और बैंकिंग ऐप्स) को लेकर भी अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

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