प्रदेश सरकार भले ही हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने और विकास के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है। मुरैना जिले से दो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो प्रशासनिक दावों और खोखले विकास की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
कहीं बच्चे पढ़ाई के लिए दलदल लांघने को मजबूर हैं, तो कहीं महज तीन महीने पहले बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। पहला मामला पोरसा विकासखंड की ग्राम पंचायत कीचौल के गुमानपुरा गांव का है। यहाँ मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हर कोई हैरान रह गया, जब करीब 20 से 25 स्कूली बच्चे अपने माता-पिता की उंगली थामे जिला कलेक्टर से गुहार लगाने पहुंचे।
स्कूल जाने वाला रास्त दलदल में तब्दील
बच्चों के हाथों में किताबों की जगह अपनी पढ़ाई के हक के लिए शिकायती आवेदन था। बच्चों और ग्रामीणों का साफ कहना है कि गांव से स्कूल तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो चुका है। बारिश के दिनों में तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। रास्ते में घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब इस बदहाल रास्ते की वजह से शिक्षक भी समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है।
बच्चे पहुंचे कलेक्ट्रेट की चौखट
ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से सरपंच और सचिव के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। जिम्मेदार अधिकारियों की इसी अनदेखी से परेशान होकर आखिरकार बच्चों को खुद कलेक्ट्रेट की चौखट पर आना पड़ा। विकास के दावों की हवा उड़ाती दूसरी तस्वीर जनपद पंचायत कैलारस के ग्राम पंचायत आंतरी से सामने आई है।पहली बारिश भी नहीं झेल पाई सड़क
यहाँ के वार्ड क्रमांक 6, 7 और 8 के बाशिंदे इन दिनों सरकारी सिस्टम की लापरवाही का दंश झेल रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, महज तीन महीने पहले यहाँ एक सीसी (सीमेंट-कंक्रीट) सड़क का निर्माण कराया गया था। लेकिन भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की वजह से यह सड़क पहली बारिश भी ठीक से नहीं झेल पाई और जगह-जगह से टूटकर बिखर गई।
जलभराव की बड़ी समस्या: सड़क तो टूटी ही, साथ ही पानी की निकासी (नाली) की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह है कि पूरी सड़क पर चौबीसों घंटे गंदा पानी जमा रहता है।
ग्रामीणों की मांग: परेशान ग्रामीणों ने जनपद पंचायत और आला अधिकारियों से मांग की है कि इस घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सड़क की मरम्मत के साथ-साथ जल निकासी का परमानेंट इलाज किया जाए, ताकि राहगीरों और बच्चों को राहत मिल सके।