दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने मौसम में बड़े बदलाव और संभावित जलवायु संकट को लेकर नई चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में एक संभावित “सुपर अल नीनो” तेजी से विकसित हो रहा है, जो आने वाले महीनों में दुनिया के मौसम पैटर्न को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यह प्रणाली मजबूत होती है तो वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है और कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और तूफान जैसी चरम मौसम घटनाएं बढ़ सकती हैं।राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन यानी NOAA ने कहा है कि जुलाई तक अल नीनो के विकसित होने की लगभग 80 प्रतिशत संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सामान्य अल नीनो से अधिक शक्तिशाली हो सकता है, इसलिए इसे “सुपर अल नीनो” कहा जा रहा है।
अल नीनो
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब बनती है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह समुद्री तापमान में बदलाव दुनिया भर के मौसम पर असर डालता है। अल नीनो बनने पर कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ आती है, जबकि कई देशों में सूखा और अत्यधिक गर्मी बढ़ जाती है। इसका असर कृषि, जल संसाधन, समुद्री जीवन और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ सकता है। मौजूदा समय में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, जो बड़े स्तर की जलवायु घटना की ओर संकेत कर रहा है। हालांकि अल नीनो कितना शक्तिशाली होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
हवाओं और महासागर की गतिविधियों पर असर
वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो का प्रभाव केवल समुद्री तापमान पर नहीं बल्कि वायुमंडलीय गतिविधियों और ट्रेड विंड्स यानी व्यापारिक हवाओं पर भी निर्भर करता है। यदि प्रशांत महासागर में चलने वाली हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो समुद्र का गर्म पानी पूर्वी हिस्से की ओर बढ़ने लगता है, जिससे अल नीनो और मजबूत हो सकता है। वहीं यदि हवाएं सामान्य स्थिति में रहती हैं तो इसकी तीव्रता कम हो सकती है। महासागर और वायुमंडल के बीच होने वाली ये प्रक्रियाएं बेहद जटिल होती हैं और इनका सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं होता। यही कारण है कि वैज्ञानिक अभी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि यह अल नीनो कितना विनाशकारी हो सकता है।
वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक
यदि सुपर अल नीनो विकसित होता है तो पहले से जारी जलवायु परिवर्त के प्रभाव और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार रिकॉर्ड गर्मी का सामना कर रही है। कई देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो इस गर्मी को और बढ़ा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाला समय अब तक का सबसे गर्म दौर साबित हो सकता है। इससे जंगलों में आग, ग्लेशियर पिघलने, समुद्री जल स्तर बढ़ने और जल संकट जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
भारत समेत एशिया पर होगा असर
भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों पर भी अल नीनो का बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो का असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। कई बार इसके कारण सामान्य से कम बारिश होती है, जिससे सूखे की स्थिति बन सकती है। यदि मानसून कमजोर रहा तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में इसका असर खाद्य उत्पादन, पानी की उपलब्धता और महंगाई तक पर पड़ सकता है। हर अल नीनो का असर अलग होता है, इसलिए अभी यह तय नहीं है कि भारत में इसका प्रभाव कितना गंभीर होगा।
अमेरिका और अन्य देशों में मौसम घटनाएं
सुपर अल नीनो के कारण अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी मौसम असामान्य हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की संभावना बढ़ सकती है, जबकि अन्य इलाकों में सूखा और गर्म हवाएं बढ़ सकती हैं। समुद्री तूफानों की गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। दुनिया पहले ही जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रही है। ऐसे में यदि सुपर अल नीनो विकसित होता है तो यह स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
वैज्ञानिको की लगातार निगरानी
राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन समेत दुनिया की कई मौसम एजेंसियां प्रशांत महासागर की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। वैज्ञानिक समुद्री तापमान, हवाओं की दिशा और वायुमंडलीय बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि समय रहते संभावित खतरों को लेकर देशों को चेतावनी दी जा सके। आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि समुद्री तापमान लगातार बढ़ता रहा और हवाएं कमजोर हुईं तो सुपर अल नीनो की संभावना और मजबूत हो सकती है। फिलहाल दुनिया भर के वैज्ञानिक और मौसम एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह जलवायु घटना आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम प्रणाली को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती है।
