छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से जुड़ा युवतियों के कथित बंधक बनाए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। रोजगार दिलाने के नाम पर झारखंड ले जाई गई कई युवतियों के वापस नहीं लौट पाने की खबर ने पूरे इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, वहीं युवतियों के परिवारों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उनकी बेटियां बेहतर रोजगार की उम्मीद में घर से बाहर गई थीं, लेकिन अब वे वहां फंसी हुई हैं और उनसे ठीक से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।
कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
मामले को लेकर कांकेर कलेक्ट्रेट में उस समय भावुक माहौल बन गया जब कई परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षित वापसी की मांग लेकर पहुंचे। राजकुमार दर्रो, माधव नेताम, बाबूलाल मंडावी समेत अन्य ग्रामीणों ने श्रम विभाग के माध्यम से कलेक्टर को आवेदन सौंपा। आवेदन में बताया गया कि उनकी बेटियां नौकरी के लिए झारखंड गई थीं, लेकिन अब उन्हें वापस आने नहीं दिया जा रहा है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि युवतियों को अच्छे वेतन और रोजगार का लालच देकर दूसरे राज्य भेजा गया, जहां बाद में उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। कई परिवारों ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनकी बेटियों से सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे पूरे गांव में भय और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
एक मोबाइल संदेश से सामने आया पूरा मामला
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा एक युवती द्वारा भेजे गए गुप्त मोबाइल संदेश से हुआ। बताया जा रहा है कि दुर्गूकोंदल क्षेत्र की एक युवती ने गांव के एक युवक को मैसेज भेजकर मदद मांगी। युवती ने संदेश में बताया कि उन्हें नौकरी दिलाने के बहाने झारखंड लाया गया और अब वहां जबरन काम कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, घर लौटने की अनुमति भी नहीं दी जा रही।
इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और ऑडियो संदेश वायरल होने लगे, जिनमें कई युवतियां मदद की अपील करती दिखाई दीं। इन संदेशों के सामने आने के बाद मामला तेजी से फैल गया और प्रशासन को भी इसकी जानकारी मिली।
मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की आशंका
मामले के सामने आते ही मानव तस्करी के संगठित गिरोह की आशंका जताई जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता ललित नरेटी ने दावा किया कि केवल कांकेर जिले की ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों की लगभग 35 युवतियां झारखंड में फंसी हुई हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की भी संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के गढ़वा इलाके में कुछ निजी संस्थानों और घरों में इन युवतियों से काम कराया जा रहा था। कई लड़कियों को बाहरी लोगों से बातचीत करने की अनुमति नहीं थी। आशंका जताई जा रही है कि दलाल और अवैध प्लेसमेंट एजेंसियां ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की गरीब युवतियों को बेहतर नौकरी और ऊंची सैलरी का सपना दिखाकर बाहर ले जाती हैं और बाद में उनका शोषण करती हैं।
बेरोजगारी और पलायन बन रहा बड़ी समस्या
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बस्तर और कांकेर जैसे आदिवासी इलाकों में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण युवा बड़ी संख्या में पलायन करने को मजबूर हैं। बाहरी राज्यों से रोजगार संबंधी विज्ञापन और एजेंसियां यहां के युवाओं को आसानी से अपने जाल में फंसा लेती हैं।
ललित नरेटी ने कहा कि भोले-भाले आदिवासी युवक-युवतियां अच्छे भविष्य की उम्मीद में दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद कई बार उन्हें प्रताड़ना और शोषण का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मानव तस्करी और अवैध प्लेसमेंट एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई, रेस्क्यू की तैयारी
मामले ने तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। कांकेर कलेक्टर ने कहा है कि प्रशासन युवतियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। जैसे ही सटीक जानकारी मिलेगी, एक विशेष टीम को झारखंड भेजा जाएगा। इसके अलावा श्रम विभाग और पुलिस विभाग को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि झारखंड प्रशासन से समन्वय बनाकर युवतियों को सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं पुलिस इस पूरे मामले में मानव तस्करी के एंगल से भी जांच कर रही है।
बेटियों की सुरक्षित वापसी का इंतजार
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी, पलायन और जागरूकता की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। लगातार सामने आ रही मानव तस्करी की घटनाएं प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
फिलहाल कांकेर जिले के कई परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गांवों में चिंता और गुस्से का माहौल है, जबकि लोग प्रशासन से जल्द और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि फंसी हुई युवतियां कब सुरक्षित अपने घर लौट पाएंगी।
