बॉलीवुड अभिनेता राहुल देव ने हाल ही में अपनी निजी जिंदगी और करियर को लेकर बेहद भावुक खुलासे किए हैं। फिल्मों में अपने दमदार अभिनय और खासतौर पर निगेटिव किरदारों के लिए पहचान बनाने वाले राहुल देव ने बताया कि साल 2009 में पत्नी रवीना देव के निधन के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में वे मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे। पत्नी को खोने का दर्द इतना गहरा था कि उन्हें लंबे समय तक समझ ही नहीं आया कि जिंदगी को आगे कैसे बढ़ाना है। उस समय उनका बेटा सिद्धार्थ काफी छोटा था और उसकी पूरी जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। राहुल देव ने बताया कि उन्होंने बेटे की परवरिश को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी और इसी वजह से फिल्मों, ग्लैमर और इंडस्ट्री की चमक-दमक से दूरी बना ली। उनके अनुसार उस समय करियर से ज्यादा जरूरी अपने बेटे को संभालना और उसे सामान्य जिंदगी देना था। उन्होंने कई फिल्मी प्रोजेक्ट्स भी छोड़ दिए ताकि वे परिवार के साथ समय बिता सकें और बेटे को अकेलापन महसूस न हो।
सिंगल पैरेंट बनने का संघर्ष
राहुल देव ने कहा कि वे सिंगल पैरेंट बनने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। एक पिता के रूप में बेटे की जिम्मेदारी निभाना उनके जीवन का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। उन्हें घर, परिवार, बेटे की पढ़ाई और भावनात्मक स्थिति सब कुछ अकेले संभालना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि बाहर से वे खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करते थे, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे। अभिनेता ने कहा कि उस समय उन्हें एहसास हुआ कि जिंदगी कितनी तेजी से बदल सकती है और मुश्किल परिस्थितियों में मानसिक मजबूती कितनी जरूरी होती है।
इंडस्ट्री में वापसी आसान नहीं थी
करीब चार साल से ज्यादा समय तक इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद जब राहुल देव ने दोबारा फिल्मों में वापसी करने की कोशिश की, तो उन्हें बड़ा झटका लगा। उन्होंने कहा कि 80 से ज्यादा फिल्मों में काम करने के बावजूद ऐसा महसूस हुआ जैसे इंडस्ट्री उन्हें पूरी तरह भूल चुकी है। राहुल देव के मुताबिक फिल्म इंडस्ट्री बहुत तेजी से बदलती है और लंबे समय तक दूर रहने पर लोगों का ध्यान नए कलाकारों की ओर चला जाता है। उन्होंने कहा कि वापसी के दौरान उन्हें फिर से खुद को साबित करना पड़ा। फिल्म मेकर्स की पसंद बदल चुकी थी और इंडस्ट्री में नए चेहरे आ चुके थे। ऐसे में दोबारा काम पाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने इसे किसी नए कलाकार की तरह दोबारा संघर्ष शुरू करने जैसा बताया।
आध्यात्मिक गुरु ने दिया सहारा
राहुल देव ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में अपने आध्यात्मिक गुरु की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वे पूरी तरह टूट चुके थे, तब उनके गुरु ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद की। उनके अनुसार आध्यात्मिक सोच और ध्यान ने उन्हें दुख से बाहर निकलने और जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। राहुल देव ने कहा कि अगर उन्हें अपने गुरु का सहारा नहीं मिला होता, तो शायद वे उस दौर से कभी बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिकता ने उन्हें मानसिक शांति दी और जिंदगी को नए नजरिए से देखने की ताकत दी।
फिल्मों में बनाई अलग पहचान
राहुल देव हिंदी के अलावा पंजाबी, तेलुगु, तमिल और कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुके हैं। वे खासतौर पर दमदार विलेन, गैंगस्टर और गंभीर किरदारों के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी आवाज, स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय शैली ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। हालांकि लंबे समय तक इंडस्ट्री से दूर रहने के कारण उनके करियर की रफ्तार प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे फिर से काम करना शुरू किया।
फैंस कर रहे समर्थन
राहुल देव आमतौर पर अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखते हैं, यही वजह है कि उनका यह भावुक इंटरव्यू लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उनके संघर्ष और ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के पीछे कलाकारों की निजी परेशानियां और संघर्ष अक्सर दिखाई नहीं देते। राहुल देव की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने निजी दुख, जिम्मेदारियों और करियर के संघर्षों के बीच खुद को संभालने की कोशिश की और जिंदगी में आगे बढ़ने का साहस दिखाया। राहुल देव ने अपने करियर में हिंदी के अलावा पंजाबी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी काम किया है। वे बॉलीवुड और साउथ इंडियन सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, गहरी आवाज और खतरनाक विलेन वाले अंदाज से अलग पहचान बनाई। राहुल देव ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा और अपनी अभिनय क्षमता के दम पर इंडस्ट्री में मजबूत जगह बना ली।
फ़िल्मी करियर और हिट फ़िल्में
राहुल देव को खास पहचान निगेटिव किरदारों और गंभीर भूमिकाओं से मिली। वे उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने हीरो से ज्यादा अपने विलेन वाले किरदारों से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनकी पर्सनैलिटी, स्टाइल और संवाद बोलने का अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आया। उनकी शुरुआती चर्चित फिल्मों में चैंपियन शामिल है, जिसमें उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने अशोक में भी अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म में शाहरुख़ खान ,और करीना कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे, लेकिन राहुल देव के किरदार ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद राहुल देव ने कई बड़ी फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाईं। आवारा पागल दीवान में उनका अलग अंदाज देखने को मिला। यह फिल्म कॉमेडी और एक्शन से भरपूर थी और इसमें राहुल देव ने अपने किरदार को काफी प्रभावशाली तरीके से निभाया। Footpath और अंदाज जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय की काफी तारीफ हुई। खासतौर पर “फुटपाथ” में उनके गंभीर और नेगेटिव शेड वाले किरदार ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। वहीं “अंदाज” जैसी सुपरहिट फिल्म में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा ऐलान में भी राहुल देव ने दमदार अभिनय किया। एक्शन और थ्रिलर फिल्मों में उनका स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा मजबूत माना गया। यही वजह रही कि लंबे समय तक वे बॉलीवुड के चर्चित विलेन कलाकारों में शामिल रहे। राहुल देव ने सिर्फ हिंदी फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। तेलुगु और तमिल फिल्मों में उनके विलेन किरदारों को काफी लोकप्रियता मिली। साउथ सिनेमा में भी उनकी अलग फैन फॉलोइंग बन गई थी। वे बड़ी फिल्म में भी अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा Torbaaz में भी वे नजर आए, जिसमें संजय दत्त मुख्य भूमिका में थे। फिल्मों के अलावा राहुल देव ने टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वे कई टीवी शोज़ और रियलिटी कार्यक्रमों में दिखाई दिए। उनकी फिटनेस और पर्सनैलिटी को लेकर भी लोग उन्हें काफी पसंद करते हैं। लंबे समय तक वे फिटनेस आइकन के रूप में भी चर्चा में रहे।
