देश में सोना-चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इसी बीच पीएम नरेन्द्र मोदी की ओर से देशवासियों से अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
1. सोने पर टैक्स का 'डबल अटैक'
सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और गिरते रुपये को संभालने के लिए सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी वृद्धि की है।
पुरानी दर: 6%
नई दर: 15% (10% बेसिक कस्टम ड्यूटी + 5% सेस)
असर: यह नई दरें आज 13 मई से प्रभावी हो गई हैं, जिसके चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमतें 6% तक उछल गई हैं।
2. पीएम मोदी की अपील, एक साल तक न खरीदें सोना
पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश को संबोधित करते हुए एक साहसिक अपील की। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि अगले एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें। इस अपील के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और सोने के आयात पर खर्च होने वाली भारी विदेशी मुद्रा को बचाना है।
3. आयात में गिरावट और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
आंकड़े बताते हैं कि भारत में सोने की भूख कम हो रही है, लेकिन सरकार इसे और नियंत्रित करना चाहती है:
2025 का डेटा: पिछले साल भारत ने 710.9 टन सोने का आयात किया था।
2026 की स्थिति: इस साल की पहली तिमाही में मांग घटकर मात्र 151 टन रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीएम की अपील का असर हुआ और देश ने एक साल तक सोना नहीं खरीदा, तो भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम होगा और रुपया वैश्विक स्तर पर मजबूत होगा।
जहाँ सरकार इस कदम को मास्टरस्ट्रोक मान रही है, वहीं सीमा शुल्क अधिकारियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि:
"2024 में इंपोर्ट ड्यूटी घटने के बाद देश में सोने की स्मगलिंग (तस्करी) लगभग खत्म हो गई थी। अब टैक्स को अचानक 15% तक ले जाने से अवैध तस्करी के मामले दोबारा
बढ़ सकते हैं, जो सुरक्षा और राजस्व के लिए चुनौती होगा।"
आम आदमी पर क्या होगा असर?
शादियों का बजट बिगड़ा: शादियों के सीजन में सोने के दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा।
निवेश के विकल्प: सरकार चाहती है कि लोग भौतिक सोने (Physical Gold) के बजाय डिजिटल गोल्ड या अन्य वित्तीय संपत्तियों में निवेश करें।
कीमती धातुएं महंगी: सोने के साथ-साथ चांदी और अन्य प्लैटिनम जैसी धातुओं के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।
सरकार के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि फिलहाल प्राथमिकता 'रुपये की सेहत' है, न कि 'सोने की चमक'। अब देखना यह है कि जनता प्रधानमंत्री की इस अपील को किस तरह लेती है।
