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बेलापानी में पेयजल संकट
बेलापानी में पेयजल संकट
कबीरधाम

35 बैगा परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर, ग्रामीणों ने उठाई स्थायी पेयजल व्यवस्था की मांग

कवर्धा जिले के बेलापानी गांव में बैगा जनजाति के करीब 35 परिवार दूषित नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और उपमुख्यमंत्री तक समस्या पहुंचाई, लेकिन अब तक स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं हो सकी है। उन्होंने जल्द हैंडपंप लगाने और साफ पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 07 Aug 2026, 05:29 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 09:36 AM
कवर्धा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती है। जिले के ग्राम पंचायत राजाढार के आश्रित गांव बेलापानी में बैगा जनजाति के करीब 35 परिवार आज भी साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 
कबीरधाम जिले के बेलापानी गांव में बारिश के मौसम में ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट और गहरा गया है। गांव के लोग मजबूरी में नदी का मटमैला और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे रोजाना नदी से पानी भरकर घर लाते हैं और इसी पानी का उपयोग पीने तथा घरेलू कामों के लिए करते हैं।

दूषित पानी से बढ़ रहा बीमारी का खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से गंदा पानी पीने के कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में नदी का पानी और ज्यादा खराब हो जाता है। वहीं बाढ़ आने की स्थिति में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द ही साफ पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई तो गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
 बेलापानी में नदी से पानी भरते ग्रामीण

उपमुख्यमंत्री से शिकायत, फिर भी नहीं मिली राहत 

ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने अपनी परेशानी उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तक भी पहुंचाई, लेकिन इसके बावजूद गांव में न तो हैंडपंप लगाया गया और न ही कोई स्थायी पेयजल व्यवस्था शुरू हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन के बजाय अब उन्हें धरातल पर समाधान चाहिए।

ग्रामीणों ने पूछा- किसी की जान गई तो जिम्मेदार कौन

बेलापानी के लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दूषित पानी पीने से अगर किसी ग्रामीण की जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। ग्रामीणों ने तत्काल हैंडपंप लगाने और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।

समय रहते व्यवस्था नहीं हुई तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बारिश के मौसम को देखते हुए जल्द से जल्द गांव में सुरक्षित पानी की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को दूषित पानी पीने की मजबूरी से राहत मिल सके।
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