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रायगढ़ में बायोगैस से जलती नीली लौ
रायगढ़ में बायोगैस से जलती नीली लौ
राज्य सरकार

आत्मनिर्भर : छत्तीसगढ़ में बायोगैस क्रांति, बड़े देवगांव का बंद पड़ा प्लांट दोबारा हुआ क्रियाशील  

महंगे ईंधन से राहत और आर्थिक बचत: इस संयंत्र के पुनर्जीवन से स्थानीय ग्रामीणों को महंगे एलपीजी (LPG) सिलेंडर की निर्भरता से बड़ी राहत मिलेगी। गांवों में घरेलू ईंधन की चौबीसों घंटे सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित होने से महिलाओं को लकड़ी इकट्ठा करने की परेशानी और चूल्हे के हानिकारक धुएँ से मुक्ति मिलेगी, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा और परिवारों के मासिक खर्च में भारी बचत होगी।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Jun 2026, 10:45 AM · अपडेट: 02 Nov 2026, 12:21 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

गोबर गैस संयंत्रों का पुनर्जीवन ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक बेहद प्रभावी कदम साबित हो रहा है। यह पहल गांवों को महंगे एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर निर्भरता से मुक्त कर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए उत्तम जैविक खाद प्रदान करती है।

सफल रहा गैस परीक्षण

मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत रायगढ़ के सीधे मार्गदर्शन में इस संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्रेडा (CREDA) की विशेष तकनीकी टीम, जिला पंचायत के आला अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से संयंत्र का बारीकी से आकलन किया। आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य तत्काल पूरे किए गए। इसके बाद संयंत्र को सफलतापूर्वक चालू करके बायोगैस से सीधे चूल्हा जलाया गया।

महंगे एलपीजी से मिलेगी मुक्ति

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक ईंधन के धुएँ से महिलाओं को मुक्ति दिलाने के लिए बायोगैस संयंत्रों के नियमित रखरखाव, तकनीकी अपग्रेडेशन और पुनर्जीवन पर विशेष फोकस कर रही है। इस संयंत्र के दोबारा शुरू होने से स्थानीय ग्रामीण परिवारों को चौबीसों घंटे घरेलू ईंधन की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

कचरे से कंचन

यह बायोगैस संयंत्र केवल स्वच्छ ईंधन ही उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गाँव के पर्यावरण को भी दुरुस्त रखता है। गाँव में इकट्ठा होने वाले गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों (Organic Waste) के प्रभावी व वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से यह पर्यावरण संरक्षण में अनूठी भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही, गैस बनने के बाद संयंत्र से निकलने वाली उत्तम श्रेणी की जैविक खाद (स्लरी) खेतों की उत्पादकता बढ़ाने में रामबाण साबित होगी, 

जागरूकता अभियान

संयंत्र के शुभारंभ के इस खास अवसर पर उपस्थित हितग्राहियों और ग्रामीणों को इसके सुचारू संचालन के लिए जागरूक भी किया गया। तकनीकी टीम द्वारा ग्रामीणों को समझाया गया कि संयंत्र में गोबर की निर्धारित मात्रा ही डालें, पाइपलाइन की समय-समय पर जांच करें और किसी भी तकनीकी समस्या के आने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। 

ग्रामीणों में खुशी की लहर

बड़े देवगांव के निवासियों ने इस संयंत्र के दोबारा शुरू होने पर प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए खुशी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें लकड़ी इकट्ठा करने या महंगे सिलेंडरों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। स्वच्छ ईंधन मिलने से उनके समय की बचत होगी, स्वास्थ्य सुधरेगा और चूल्हे के धुएँ से होने वाली बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी।

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