छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए पंतोरा चौकी में पदस्थ प्रधान आरक्षक रमेश त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद की गई है, जिसमें उन पर जमीन से जुड़े एक मामले में कब्जा दिलाने के नाम पर ग्रामीण से अवैध रूप से 40,000 रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए त्वरित कदम उठाया है।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
पूरा मामला तब सामने आया जब बलौदा क्षेत्र के पंतोरा थाना अंतर्गत निवासी विकाश देवांगन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि प्रधान आरक्षक रमेश त्रिपाठी ने उन्हें जमीन पर कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि इस काम के एवज में उनसे 40,000 रुपये की मांग की गई और यह राशि उनसे ले ली गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें भरोसे में लेकर यह राशि ली गई, लेकिन काम पूरा नहीं किया गया।
मामले को और गंभीर बनाया
सोशल मीडिया पर वायरल
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से फैल गया, जिससे पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया। लोगों ने सवाल उठाए कि यदि किसी पुलिस कर्मी पर इस तरह के आरोप साबित होते हैं, तो कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।
आदेश जारी
निलंबन आदेश में क्या कहा गया
निलंबन आदेश के अनुसार, प्रधान आरक्षक रमेश त्रिपाठी को अब निलंबन अवधि के दौरान केवल नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। इस दौरान वे किसी भी प्रकार की नियमित ड्यूटी या पुलिस कार्य में शामिल नहीं रहेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई प्राथमिक स्तर पर की गई है और आगे की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
