खूनी संघर्ष : ट्रैक्टर से रौंदकर 60 वर्षीय किसान की हत्या, 8 आरोपी गिरफ्तार
सरगुजा जिले के बतौली थाना क्षेत्र के पथरई गांव में जमीन विवाद ने रविवार को खूनी रूप ले लिया। लगभग 6.30 एकड़ विवादित भूमि पर कब्जे और जुताई को लेकर दो पक्षों में पुराना विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते 60 वर्षीय किसान होसराम पैकरा की दूसरे पक्ष के 7–8 लोगों ने डंडों से बेरहमी से पिटाई करने के बाद ट्रैक्टर से रौंदकर हत्या कर दी।
सरगुजा जिले के बतौली थाना क्षेत्र अंतर्गत पथरई के पास रविवार को जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच 60 वर्षीय किसान होसराम पैकरा की बेरहमी से पिटाई करने के बाद ट्रैक्टर से रौंदकर हत्या कर दी गई। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
ग्राम सिलमा में लगभग 6.30 एकड़ भूमि के नामांतरण और कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच कई वर्षों से राजस्व न्यायालय में मामला लंबित था। एक पक्ष सिलमा निवासी होसराम पैकरा और दूसरा पक्ष पथरई निवासी बजरंग पैकरा भूमि पर मालिकाना हक का दावा कर रहे थे। विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था, लेकिन इसका समाधान अब तक नहीं निकल पाया था।
प्रशासन तक पहुंचा मामला, फिर भी नहीं थमा तनाव
परिजनों के अनुसार, होसराम पैकरा का परिवार कई बार कलेक्टर, एसडीएम और तहसील कार्यालयों में न्याय की गुहार लगा चुका था। आशंका जताते हुए कुछ दिन पहले थाना बतौली में संभावित विवाद को लेकर आवेदन भी दिया गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। रविवार को जब बजरंग पैकरा पक्ष के लोग खेत में जुताई और बोआई कर रहे थे, तभी होसराम पैकरा अपने परिवार के साथ वहां पहुंचे और विरोध करने लगे। इसी दौरान दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। आरोप है कि 7 से 8 लोगों ने होसराम और उनके परिवार पर डंडों से हमला कर दिया। मारपीट के दौरान होसराम जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद एक युवक ने ट्रैक्टर चढ़ाकर उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
शव को भेजा गया पोस्टमार्टम के लिए
घटना की जानकारी मिलते ही सीतापुर एसडीओपी राजेंद्र मंडावी और बतौली थाना प्रभारी विवेक सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में भुवनेश्वर, बजरंग, उमेश, मनोज, रघुनंदन, बोधन, कमली और प्यारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर उमेश चला रहा था, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।
वसीयतनामा बना विवाद की जड़
जानकारी के अनुसार, यह भूमि मूल रूप से कामेश्वरी के नाम दर्ज थी। उनके निःसंतान होने और भरण-पोषण की जिम्मेदारी धनेश्वरी द्वारा निभाए जाने के आधार पर वसीयतनामा धनेश्वरी के पक्ष में किए जाने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरे पक्ष भी इसी जमीन पर अधिकार का दावा कर रहा है, जिसके चलते नामांतरण का मामला वर्षों से राजस्व विभाग में लंबित है। लंबे समय से लंबित राजस्व विवाद, प्रशासनिक देरी और तनावपूर्ण स्थिति ने आखिरकार एक किसान की जान ले ली। घटना ने एक बार फिर भूमि विवादों के समय पर निपटारे की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।