छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग ने रविवार को कारोबारी राजकुमार सराफ के ठिकानों पर संयुक्त रूप से छापेमारी की। दोनों एजेंसियों की टीम ने कई घंटे तक दस्तावेजों और अन्य जरूरी सामग्रियों की जांच की। इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज टीम ने अपने कब्जे में लिए हैं। मामले में शिकायत भी दर्ज की गई है।
CBI ने यह कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर की है। मामला करीब 11.38 करोड़ रुपए के लोन घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी ने धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी के डायरेक्टर्स, गारंटर्स और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बैंक को धोखा देकर लोन राशि के दुरुपयोग का आरोप
आरोप है कि कंपनी से जुड़े लोगों ने बैंक से लिए गए लोन का निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कामों में इस्तेमाल किया। इससे बैंक को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ। CBI ने मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, खातों में हेरफेर और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं के तहत जांच शुरू की है। जांच के घेरे में आई धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड खनिज कारोबार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी बॉक्साइट की बिक्री और एक्सपोर्ट का काम करती थी। इसके अलावा केएसआर इंफ्रा और केपेक्स इंटरप्राइजेज नाम की अन्य फर्में भी इससे जुड़ी हुई हैं। आरोप है कि इन कंपनियों की जरूरतों के लिए बैंक से लोन लिया गया था।
लेन-देन की जांच में सामने आए कई ट्रांजेक्शन
CBI की प्रारंभिक जांच में मार्च 2024 के दौरान कई बड़े वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार—
- 26 मार्च 2024: राधे कृष्णा इंटरप्राइजेज को 91 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। इसी दिन क्रेडिट खाते में भी 91 लाख रुपए जमा हुए।
- 27 मार्च 2024: करीब 1.63 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए और उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में लगभग 1.64 करोड़ रुपए जमा किए गए।
- 28 मार्च 2024: करीब 1.97 करोड़ रुपए भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
लोन नहीं चुकाने पर खाता हुआ NPA
बैंक ने समय पर भुगतान नहीं होने के कारण 12 अक्टूबर 2024 को लोन खाते को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। CBI का कहना है कि करीब 4.51 करोड़ रुपए की राशि को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर पैकिंग क्रेडिट खाते में समायोजित किया गया। एजेंसी अब पूरे वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। बैंक की ओर से इस मामले में 7 मई 2026 को आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद CBI ने जांच शुरू करते हुए संबंधित ठिकानों पर कार्रवाई की। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।