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दो आरोपी गिरफ्तार
दो आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग

एक्शन : महिलाओं के लोन की करोड़ों की राशि गायब, दुर्ग में दो कर्मचारी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में माइक्रो फाइनेंस कंपनी की धमधा शाखा में 267 महिला ग्राहकों से वसूले गए 1.11 करोड़ रुपए कंपनी के खाते में जमा नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। ऑडिट में खुलासे के बाद पुलिस ने दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
06 Jul 2026, 11:47 AM
दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में महिलाओं को दिए जाने वाले माइक्रो फाइनेंस लोन की वसूली में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की धमधा शाखा में करीब 1.11 करोड़ रुपए की रकम कंपनी के खाते में जमा नहीं किए जाने का खुलासा हुआ है।
मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। जानकारी के मुताबिक, सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड का सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ अनुबंध है। कंपनी बैंक की ओर से महिला ग्राहकों को लोन उपलब्ध कराने और उनकी मासिक किस्तों की वसूली का काम करती है। मई 2026 में धमधा शाखा का नियमित ऑडिट कराया गया, जिसमें वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़ी अनियमितता उजागर हुई। 

267 महिलाओं से वसूले गए 1.11 करोड़ रुपए

जांच में पाया गया कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने महिलाओं से वसूली गई लोन की किस्त, लोन क्लोजर की राशि और अन्य भुगतान कंपनी के खाते में जमा ही नहीं किए। कंपनी ने शुरुआती जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर पूरी राशि जमा करने और अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। हालांकि किसी ने भी न तो रकम लौटाई और न ही नोटिस का जवाब दिया। इसके बाद विस्तृत ऑडिट कराया गया, जिसमें पता चला कि 267 महिला ग्राहकों से वसूले गए कुल 1 करोड़ 11 लाख 93 हजार 173 रुपए कंपनी के खाते में जमा नहीं किए गए। स्टेट हेड अशोक कुमार वर्मा की शिकायत पर धमधा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

दो आरोपी गिरफ्तार, दो अब भी फरार

दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, दोनों ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बेमेतरा जिले के साजा निवासी अनिल विश्वकर्मा (23) और दुर्ग जिले के पाटन निवासी संदीप कुमार खूंटीहरे (31) के रूप में हुई है। वहीं, मामले में नामजद पूर्व शाखा प्रबंधक रविशंकर दीवान और कर्मचारी देवव्रत कौशल अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। 

शुरुआत 43 खातों से, बाद में बढ़ता गया घोटाला 

कंपनी के स्टेट हेड ने अपनी शिकायत में बताया कि ऑडिट के शुरुआती चरण में 43 ग्राहकों के खातों में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद जब पूरे रिकॉर्ड की गहन जांच की गई तो मामला कहीं अधिक बड़ा निकला और करोड़ों रुपए के गबन का खुलासा हुआ। एटीएम कार्ड और बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग का आरोप जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में ग्राहकों के एटीएम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी जानकारियों का गलत इस्तेमाल किया गया। रिकॉर्ड में हेरफेर के भी प्रमाण मिले हैं। कंपनी का कहना है कि इस धोखाधड़ी से उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उसकी साख पर भी असर पड़ा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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