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ऐतिहासिक बदलाव : 18 बड़े फैसले और 1.72 लाख करोड़ का निवेश, भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक डील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में 18 बड़े फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इस बैठक में व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

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प्रकाशित: 11 Jul 2026, 10:41 AM · अपडेट: 06 Oct 2026, 02:11 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भारत और न्यूजीलैंड के कूटनीतिक तथा व्यापारिक रिश्तों में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अपनी तीन देशों की आधिकारिक यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ऑकलैंड में वहां के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच 18 बड़े नीतिगत फैसले लिए गए और 10 महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। 

40 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इससे पहले साल 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था।

रणनीतिक साझेदारी का नया दौर और ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश

इस ऐतिहासिक बैठक का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि दोनों देशों ने अपने आपसी रिश्तों को अपग्रेड करते हुए 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) का दर्जा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद एक प्रेस वक्तव्य में साझा किया कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस साल रिकॉर्ड 9 महीने के भीतर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बनी है, जो दोनों देशों की प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 सालों के दौरान भारत के विभिन्न क्षेत्रों में ₹1.72 लाख करोड़ (20 अरब डॉलर) का भारी-भरकम निवेश करेगा। यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में बेहद मददगार साबित होगा।

2030 तक व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। भारत और न्यूजीलैंड ने साल 2030 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना बढ़ाकर करीब ₹35,000 करोड़ (35 हजार करोड़ रुपये) करने का साझा लक्ष्य रखा है। वाणिज्य मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से दोनों देशों के बीच कृषि, डेयरी उत्पाद, शिक्षा, डिजिटल तकनीक और पर्यटन के क्षेत्र में व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड की कंपनियों की पहुंच आसान होगी, तो वहीं भारतीय निर्यातकों को भी न्यूजीलैंड के बाजारों में बेहतर अवसर मिलेंगे।

ऑकलैंड में गूंजेगा भारत: 40 हजार प्रवासियों को संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 6 से 11 जुलाई की तीन देशों की विदेश यात्रा को समाप्त कर आज ही नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। लेकिन प्रस्थान से पहले वे ऑकलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय के एक विशाल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस भव्य समारोह में करीब 40 हजार से अधिक प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है, जो वहां की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। पीएम मोदी का यह संबोधन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट को और अधिक मजबूत करेगा।

इस ऐतिहासिक यात्रा का क्या होगा दूरगामी प्रभाव?

विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस यात्रा के प्रभाव बेहद व्यापक होने वाले हैं। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भारत और न्यूजीलैंड का एक साथ आना बेहद अहम माना जा रहा है। व्यापारिक स्तर पर भारी निवेश आने से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तेजी से लागू होने से भारतीय छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड के वीजा नियमों में भी आने वाले समय में कुछ ढील मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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