रायसेन जिले के सुल्तानगंज क्षेत्र के ग्राम मढ़िया गुसाई में बुंदेलखंड की पुरानी लोक परंपरा देखने को मिली। कम बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी थीं। ऐसे में गांव की महिलाओं ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक सैरा (डांडिया) नृत्य किया। खेड़ापति माई और हनुमान मंदिर के सामने महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ यह परंपरा निभाई। ग्रामीणों के अनुसार, जब गांव में सूखे जैसे हालात बनते हैं और बारिश नहीं होती, तब महिलाएं इंद्रदेव की आराधना के लिए सैरा नृत्य करती हैं।
बारिश के लिए महिलाओं ने किया सैरा नृत्य
यह परंपरा गांव में कई पीढ़ियों से चली आ रही है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए अच्छी बारिश और अच्छी फसल की कामना करती हैं।बारिश की उम्मीद में गांव की महिलाएं करीब दो घंटे तक सैरा नृत्य करती रहीं। डांडिया की थाप और लोकगीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस नृत्य और प्रार्थना से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और बारिश होती है।नृत्य के बाद बदला मौसम, शुरू हुई बारिश
महिलाओं की सामूहिक प्रार्थना और नृत्य के बीच अचानक मौसम बदल गया। आसमान में बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। बारिश होते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। किसानों ने राहत की सांस ली, क्योंकि वे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे थे।
लोक परंपरा ने बचाई सांस्कृतिक विरासत
मढ़िया गुसाई गांव की यह परंपरा एक बार फिर ग्रामीण संस्कृति और आस्था को सामने लेकर आई। सूखे के समय निभाई जाने वाली यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जोड़कर रखे हुए है।