Tuesday, 20 Oct 2026 भारत
W 𝕏 f
होम › राष्ट्रीय › अनोखी परंपरा : सूखे से परेशान गांव में आस्था की अ…
महिलाओं का सैरा नृत्य और बारिश का दृश्य
महिलाओं का सैरा नृत्य और बारिश का दृश्य
राष्ट्रीय

अनोखी परंपरा : सूखे से परेशान गांव में आस्था की अनोखी तस्वीर, महिलाओं के सैरा नृत्य के बाद हुई बारिश

रायसेन जिले के मढ़िया गुसाई गांव में अल्प वर्षा से परेशान ग्रामीणों ने सदियों पुरानी लोक परंपरा निभाई। महिलाओं ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सैरा (डांडिया) नृत्य किया। करीब दो घंटे चले इस अनुष्ठान के बाद मौसम बदला और बारिश शुरू हो गई, जिससे किसानों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 16 Jul 2026, 12:46 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 01:56 AM
मध्यप्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

रायसेन जिले के सुल्तानगंज क्षेत्र के ग्राम मढ़िया गुसाई में बुंदेलखंड की पुरानी लोक परंपरा देखने को मिली। कम बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी थीं। ऐसे में गांव की महिलाओं ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक सैरा (डांडिया) नृत्य किया। खेड़ापति माई और हनुमान मंदिर के सामने महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ यह परंपरा निभाई। ग्रामीणों के अनुसार, जब गांव में सूखे जैसे हालात बनते हैं और बारिश नहीं होती, तब महिलाएं इंद्रदेव की आराधना के लिए सैरा नृत्य करती हैं।

बारिश के लिए महिलाओं ने किया सैरा नृत्य

यह परंपरा गांव में कई पीढ़ियों से चली आ रही है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए अच्छी बारिश और अच्छी फसल की कामना करती हैं।बारिश की उम्मीद में गांव की महिलाएं करीब दो घंटे तक सैरा नृत्य करती रहीं। डांडिया की थाप और लोकगीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस नृत्य और प्रार्थना से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और बारिश होती है।

नृत्य के बाद बदला मौसम, शुरू हुई बारिश

महिलाओं की सामूहिक प्रार्थना और नृत्य के बीच अचानक मौसम बदल गया। आसमान में बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। बारिश होते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। किसानों ने राहत की सांस ली, क्योंकि वे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे थे।

लोक परंपरा ने बचाई सांस्कृतिक विरासत

मढ़िया गुसाई गांव की यह परंपरा एक बार फिर ग्रामीण संस्कृति और आस्था को सामने लेकर आई। सूखे के समय निभाई जाने वाली यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जोड़कर रखे हुए है।

क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें