देशभर में आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां इस वक्त फुल एक्शन मोड में हैं। आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की ताबड़तोड़ छापेमारी के बीच अब गुजरात से एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक खतरनाक मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए ATS ने 5 और संदिग्धों को दबोच लिया है। इन नई गिरफ्तारियों के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आए आरोपियों की संख्या तेजी से बढ़ गई है, जिससे यह साफ है कि घाटी से लेकर देश के मैदानी इलाकों तक फैला एक बड़ा नेक्सस रडार पर आ चुका है। ATS के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए संदिग्धों का काम सिर्फ संगठन के लिए काम करना नहीं था, बल्कि वे देश के भीतर स्लीपर सेल की तरह नए लोगों को बरगलाकर इस दलदल में खींचने की कोशिश कर रहे थे।
शुरुआती तफ्तीश में वे बेहद चौंकाने वाली बाते:
कट्टरपंथ का प्रसार: ये आरोपी लगातार युवाओं को रेडिकलाइज (कट्टरपंथी) करने और संगठन के लिए लॉजिस्टिक व फंडिंग का बैकअप तैयार करने में जुटे थे।
डिजिटल सबूतों की खंगाल: जांच टीमें फिलहाल आरोपियों के पास से जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और अन्य संदिग्ध दस्तावेजों को डिकोड कर रही हैं, ताकि इनके पूरे नेटवर्क ट्री (Network Tree) को समझा जा सके।
पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क
यह पूरी कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि कड़ियों से कड़ियां जुड़ने का नतीजा है। इससे पहले भी गुजरात और मध्य प्रदेश की पुलिस व ATS ने एक साझा ऑपरेशन चलाकर 8 संदिग्धों को सलाखों के पीछे भेजा था। पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे आरोपी? एजेंसियों को पुख्ता इनपुट मिले थे कि पकड़े गए ये संदिग्ध सीमा पार यानी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं (हैंडलर्स) के सीधे संपर्क में थे। वे वहां से मिल रहे निर्देशों के आधार पर ही सूबे में किसी बड़ी अशांति या साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे।
बंद कमरे में पूछताछ
इसी इनपुट के बाद जब ATS ने तफ्तीश का दायरा बढ़ाया, तो कड़ियां जुड़ती गईं और 5 और चेहरे बेनकाब हो गए। सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ATS की इस मुस्तैदी ने समय रहते एक बड़े खतरे को टाल दिया है। अगर यह मॉड्यूल अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता, तो सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर सकता था। फिलहाल, गिरफ्त में आए सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर बंद कमरे में मैराथन पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि इनके तार देश के किन-किन राज्यों में फैले हैं और विदेशों में बैठे किन-किन चेहरों से इन्हें सीधे फंडिंग या निर्देश मिल रहे थे। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं।