दंतेवाड़ा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, 600 साल पुरानी परंपरा जारी
रविवार (अष्टमी) को दंतेवाड़ा मंदिर से मां दंतेश्वरी की पावन डोली और छत्र को जगदलपुर स्थित बस्तर दशहरा में शामिल करने के लिए रवाना किया गया।
परंपरा का निर्वहन: जिया परिवार और पुजारियों ने पूरी निष्ठा के साथ मां की डोली को अपने कंधों पर उठाया।
श्रद्धालुओं का हुजूम: डोली के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए डंकिनी पुल तक हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई मां के दर्शन की एक झलक पाने के लिए आतुर दिखा।
डंकिनी पुल से पावन डोली को विशेष सुरक्षा व सम्मान के साथ एक वाहन से 80 किलोमीटर दूर जगदलपुर के लिए भेजा गया। सोमवार सुबह यह डोली जगदलपुर के 'जिया डेरा' पहुंचेगी, जहां शहरवासी और मांझी-चालकी पारंपरिक उत्साह व भव्यता के साथ इसका स्वागत करेंगे। यह परंपरा पिछले 600 से अधिक वर्षों से अनवरत चली आ रही है।
फूल रथ का पहिया टूटा, जेसीबी के इस्तेमाल से भड़के ग्रामीण
एक तरफ जहां डोली रवानगी को लेकर उल्लास का माहौल था, वहीं जगदलपुर में आयोजित फूल रथ परिक्रमा के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
तकनीकी बाधा: परिक्रमा शुरू होने से ठीक पहले रथ का एक पहिया और उसके ढांचे की मुख्य लकड़ी टूट गई, जिससे परिक्रमा रुक गई।
प्रशासन की कोशिश: कारीगरों ने पहिए को फिर से जोड़ने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए जेसीबी की मदद से रथ को परिक्रमा पथ पर आगे खींचने की कोशिश की।
आस्था और विवाद: जेसीबी से रथ खींचता देख वहां मौजूद ग्रामीण और श्रद्धालु भड़क गए। उनका मानना था कि सदियों पुरानी इस धार्मिक परंपरा में रथ खींचने का अधिकार केवल श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है, मशीनों का नहीं।
सीरहासार चौक पर विवाद और पुलिस का बल प्रयोग
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने सीरहासार चौक पर आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने और शांत कराने का काफी प्रयास किया, लेकिन बातचीत के बीच माहौल और गर्मा गया।
इसी गहमा-गहमी और भीड़ की धक्का-मुक्की के दौरान ट्रैफिक डीएसपी अचानक जमीन पर गिर पड़े। स्थिति को अनियंत्रित होता देख मौके पर तैनात पुलिस बल को हालात काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर किया जा सका।







