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Farmers demanding compensation (Image Source: social media)
Farmers demanding compensation (Image Source: social media)
जगदलपुर (बस्तर)

Bastar Flood Affected Farmers: फसल बर्बादी पर प्रति एकड़ 65 हजार मुआवजे की मांग, 23 ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे बस्तर के किसान

Bastar Flood Affected Farmers: बस्तर में भारी बारिश और इंद्रावती नदी की बाढ़ से धान की फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने प्रति एकड़ 65,100 रुपए मुआवजा, फसल बीमा राशि का भुगतान, कृषि ऋण में राहत और खेतों से रेत-मलबा हटाने के लिए आर्थिक सहायता की मांग की।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Oct 2026, 07:51 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
जगदलपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Bastar Flood Affected Farmers: बस्तर संभाग में बीते दिनों हुई भारी बारिश और इंद्रावती नदी की बाढ़ ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में धान की फसल सड़ चुकी है और बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब ज़मीनों पर सिर्फ रेत और मलबे की परत बिछी नज़र आ रही है। इस गंभीर संकट के बीच पीड़ितों के सब्र का बांध शनिवार को टूट गया। भारतीय किसान संघ के बैनर तले बस्तर के किसान शनिवार को 23 ट्रैक्टरों में सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उग्र प्रदर्शन करते हुए प्रशासनिक भवन का घेराव कर दिया। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आने वाली फसल के लिए खाद-बीज का इंतज़ाम करने और सिर पर चढ़े पुराने कर्ज़ को चुकाने की है।

किसानों की प्रमुख मांगें

कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तुरंत ठोस राहत देने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • भारी मुआवजा: बाढ़ से पूरी तरह तबाह हुई फसल के लिए प्रति एकड़ 65,100 रुपए का मुआवजा।

  • बीमा राशि का भुगतान: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की राशि का तुरंत निपटारा।

  • कर्ज राहत: किसानों के मौजूदा कृषि ऋणों में राहत व छूट।

  • खेतों की सफाई: खेतों में जमा रेत और मलबा हटाने के लिए विशेष सरकारी वित्तीय सहायता।

अचानक इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए। मुख्य गेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।

सरकारी प्रावधान और किसानों की मांग में बड़ा अंतर

किसानों के इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने बताया कि आपदा राहत नियमों के तहत केवल उन्हीं मामलों में सहायता दी जा सकती है, जहाँ फसल को 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो।

प्रशासन द्वारा तय सहायता दरें:

  • सिंचित भूमि (Irrigation Land): 17,000 रुपए प्रति हेक्टेयर

  • असिंचित भूमि (Non-Irrigation Land): 8,000 रुपए प्रति हेक्टेयर

सरकार के इन मौजूदा प्रावधानों और किसानों की मांग (65,100 रुपए प्रति एकड़) के बीच ज़मीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में जब तक प्रभावित खेतों का जमीनी सर्वे पूरा नहीं हो जाता, तब तक राहत राशि और वास्तविक पात्रता को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।

सितंबर अंत में मुख्यमंत्री ने किया था दौरा

गौरतलब है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मूसलाधार बारिश और इंद्रावती नदी में आए उफान से बस्तर जिले में भारी तबाही मची थी। स्थिति का जायज़ा लेने के लिए 28 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पानी उतरते ही सर्वे कार्य में तेजी लाई जाए।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर तक जिले के बाढ़ पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि बांटी जा चुकी है:

  • मकानों की क्षति: 8.78 करोड़ रुपए से अधिक।

  • घरेलू सामान का नुकसान: 52.45 लाख रुपए से अधिक।

सिर्फ फसल ही नहीं, मिट्टी की सेहत भी बिगड़ी 

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ का असर केवल चालू फसल तक सीमित नहीं रहता। खेतों में लंबे समय तक पानी ठहरा रहने के कारण धान की बालियाँ सड़ चुकी हैं। इसके अलावा, बाढ़ के साथ बहकर आई रेत और मलबे की वजह से ज़मीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित हुई है। अब अगली बुवाई से पहले खेतों को दोबारा तैयार करने में किसानों को भारी जेब ढीली करनी पड़ेगी। रही बात फसल बीमा की, तो यह सरकारी आपदा राहत से अलग व्यवस्था है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियम अधिसूचित फसल, नुकसान के प्रकार और पात्रता के आधार पर काम करते हैं, जिसकी प्रक्रिया में अभी और समय लगने की संभावना है।
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