किसानों की प्रमुख मांगें
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तुरंत ठोस राहत देने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
भारी मुआवजा: बाढ़ से पूरी तरह तबाह हुई फसल के लिए प्रति एकड़ 65,100 रुपए का मुआवजा।
बीमा राशि का भुगतान: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की राशि का तुरंत निपटारा।
कर्ज राहत: किसानों के मौजूदा कृषि ऋणों में राहत व छूट।
खेतों की सफाई: खेतों में जमा रेत और मलबा हटाने के लिए विशेष सरकारी वित्तीय सहायता।
अचानक इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए। मुख्य गेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
सरकारी प्रावधान और किसानों की मांग में बड़ा अंतर
किसानों के इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने बताया कि आपदा राहत नियमों के तहत केवल उन्हीं मामलों में सहायता दी जा सकती है, जहाँ फसल को 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो।
प्रशासन द्वारा तय सहायता दरें:
सिंचित भूमि (Irrigation Land): 17,000 रुपए प्रति हेक्टेयर
असिंचित भूमि (Non-Irrigation Land): 8,000 रुपए प्रति हेक्टेयर
सरकार के इन मौजूदा प्रावधानों और किसानों की मांग (65,100 रुपए प्रति एकड़) के बीच ज़मीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में जब तक प्रभावित खेतों का जमीनी सर्वे पूरा नहीं हो जाता, तब तक राहत राशि और वास्तविक पात्रता को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
सितंबर अंत में मुख्यमंत्री ने किया था दौरा
गौरतलब है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मूसलाधार बारिश और इंद्रावती नदी में आए उफान से बस्तर जिले में भारी तबाही मची थी। स्थिति का जायज़ा लेने के लिए 28 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पानी उतरते ही सर्वे कार्य में तेजी लाई जाए।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर तक जिले के बाढ़ पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि बांटी जा चुकी है:
मकानों की क्षति: 8.78 करोड़ रुपए से अधिक।
घरेलू सामान का नुकसान: 52.45 लाख रुपए से अधिक।







