Chhattisgarh farmers:किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी और किसान आज कलेक्ट्रेट पहुंचे। संगठन ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों से जुड़े मुद्दों के निराकरण की मांग की। किसान संघ का कहना है कि कई मांगों को लेकर प्रशासन से लगातार गुहार लगाई जा रही थी, लेकिन अपेक्षित सुनवाई नहीं होने के बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगें रखीं। किसान संघ ने ज्ञापन के माध्यम से कृषि, सिंचाई, बिजली, फसल के लाभकारी मूल्य, बीज की गुणवत्ता, कृषि अनुदान, भूमि संरक्षण और किसानों के सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
किसानों ने रखीं 18 प्रमुख मांगें
किसान संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कुल 18 मांगें शामिल हैं। इनमें किसानों को कृषि उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने और जब तक ऐसा मूल्य नहीं मिलता, तब तक क्षतिपूर्ति के रूप में प्रोत्साहन राशि देने की मांग प्रमुख है। संघ ने धान के समर्थन मूल्य को 3100 रुपए में जोड़कर देने के साथ पिछली सरकार की चौथी किस्त की राशि किसानों को उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।
सिंचाई और बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग
किसानों ने ‘हर खेत को पानी’ की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में बांध और नहर परियोजनाओं को गति देने की बात कही गई है। कृषि पंपों को स्थायी कनेक्शन देने और 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संघ ने तेलंगाना की तर्ज पर कृषि पंपों के लिए मात्र 30 रुपए सर्विस चार्ज लेने की मांग की है।
कृषि अनुदान और जीएसटी को लेकर भी मांग
भारतीय किसान संघ ने कृषि के नाम पर दिए जाने वाले विभिन्न अनुदानों की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डालने की मांग की है। साथ ही सभी प्रकार के कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त करने की मांग करते हुए कहा गया है कि किसान उत्पादक है, अंतिम उपभोक्ता नहीं। संघ ने किसान हितैषी आयात-निर्यात नीति बनाने की भी मांग की है। किसानों की फसल बाजार में आने के दौरान आयात पर रोक या आयात शुल्क बढ़ाने तथा निर्यात को खुला रखने की मांग ज्ञापन में की गई है।
बीज, भूमि और किसानों की सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे उठाए
किसानों ने गेहूं, मक्का और दलहन-तिलहन की सभी जिलों में खरीदी की व्यवस्था करने की मांग की है। खराब बीज के कारण फसल खराब होने पर किसानों को संबंधित संस्थान से मुआवजा दिलाने और दोषी संस्थान पर कार्रवाई की मांग भी की गई है। ज्ञापन में गोचर भूमि के संरक्षण, किसान हित में भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव और कृषि भूमि से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए त्वरित कृषि न्यायालय गठित करने की मांग रखी गई है। इसके अलावा किसानों के लिए कृषक बीमा, कृषक भविष्य निधि और कृषक पेंशन योजना लागू करने तथा मनरेगा को सीधे कृषि कार्यों से जोड़ने की मांग भी शामिल है।
जैविक खेती और नहरों को लेकर भी मांग
किसान संघ ने कृषि उपज मंडियों में जैविक कृषि उत्पादों की खरीदी के लिए अलग व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि किसानों को उनकी गुणवत्ता वाली उपज का उचित मूल्य मिल सके। ग्रामीण युवाओं के पलायन को रोकने के लिए कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण और स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण तथा वित्तीय सहयोग की मांग की गई है। इसके साथ ही कबीरधाम और मुंगेली में नए शक्कर कारखाने स्थापित करने, कबीरधाम के मौजूदा शक्कर कारखानों की पेराई क्षमता बढ़ाने और गन्ना किसानों से उचित एवं लाभकारी मूल्य पर गन्ना खरीदी की व्यवस्था करने की मांग की गई है। किसान संघ ने पूरे प्रदेश के नहर मार्गों का कंक्रीटीकरण कराने और नहरों पर सोलर पैनल लगाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

