Chhattisgarh Farmers Protest: नई राजधानी (नवा रायपुर) के निर्माण के लिए अपनी उपजाऊ जमीनें गंवाने वाले प्रभावित किसानों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। शासन-प्रशासन के साथ दर्जनों दौर की बैठकों, आश्वासनों और पत्राचार के बावजूद जब समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो किसानों ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आगामी 8 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित सेंट्रल पार्क में एक विशाल 'किसान महापंचायत' का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों प्रभावित परिवार, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न किसान संगठन मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
मूलभूत अधिकारों और जमीनी समस्याओं पर होगी
बात विस्थापित किसान लंबे समय से अपने अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि चमचमाती नई राजधानी बनाने के चक्कर में उनके गांवों की पारंपरिक और बुनियादी सहूलियतों की बलि चढ़ा दी गई। इस महापंचायत में मुख्य रूप से:
- गांवों की आबादी भूमि और बसाहट बस्ती का विकास
- भू-विस्थापितों को तुरंत बसाहट पट्टा जारी करना
- गांवों की श्मशान भूमि, चरागाह, तालाब और नालों का संरक्षण
- स्थानीय सड़कों का निर्माण और पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाना ( जैसे कई गंभीर मुद्दों पर तीखा मंथन होगा। )
प्रशासन पर सिर्फ 'आश्वासन' देने का आरोप
महापंचायत की तैयारियों को लेकर पूरे इलाके में सामाजिक और राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। किसानों को एकजुट करने में जुटे नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सुजीत घिदौड़े ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन अब तक किसानों को सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी पिलाता रहा है, जबकि धरातल पर स्थितियां आज भी जस की तस हैं। जब तक सभी प्रभावित किसान एक मंच पर आकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक उनकी जायज मांगें सरकारी फाइलों में ही धूल खाती रहेंगी।
महापंचायत की तैयारियों को लेकर पूरे इलाके में सामाजिक और राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। किसानों को एकजुट करने में जुटे नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सुजीत घिदौड़े ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन अब तक किसानों को सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी पिलाता रहा है, जबकि धरातल पर स्थितियां आज भी जस की तस हैं। जब तक सभी प्रभावित किसान एक मंच पर आकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक उनकी जायज मांगें सरकारी फाइलों में ही धूल खाती रहेंगी।
इस बार ठोस नतीजे के बिना पीछे हटने के मूड में नहीं किसान
किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि 8 अक्टूबर को होने वाली महापंचायत में सरकार के रुख की समीक्षा की जाएगी और आंदोलन को नया धार देने की रूपरेखा तैयार होगी। हालांकि नेताओं का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन इस बार किसान बिना लिखित और ठोस समाधान के पीछे हटने वाले नहीं हैं। सेंट्रल पार्क में होने वाले इस जमावड़े और उसमें लिए जाने वाले फैसलों पर अब पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यहीं से नवा रायपुर के किसान आंदोलन का भविष्य तय होगा।
रिपोर्ट - मोहनदास मानिकपुरी

