Chhattisgarh Paddy Procurement: छत्तीसगढ़ में आगामी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी से ठीक पहले राज्य सरकार ने किसानों के पक्ष में एक बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय से पंजीयन को लेकर आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संयुक्त खातेदारों (सह-खातेदारों) के अलग-अलग पंजीयन की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
क्या था पुराना नियम और क्यों परेशान थे किसान?
अब तक लागू नियमों के तहत, यदि किसी एक जमीन पर परिवार के कई लोगों के नाम (संयुक्त खाता) दर्ज थे, तो एग्रीस्टैक पोर्टल पर धान बेचने के लिए हर एक सह-खातेदार का अलग से पंजीयन कराना जरूरी होता था। इस प्रक्रिया के कारण किसान परिवारों को दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने पड़ते थे और सर्वर या कागजी अड़चनों की वजह से पंजीयन में काफी देरी हो जाती थी।
जानिए क्या है नया फैसला
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब संयुक्त खाते की स्थिति में पूरे परिवार के अलग-अलग सदस्यों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। परिवार के मुख्य खातेदार या 'लंबरदार' का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन ही पूरे खाते के लिए मान्य होगा। उसी पंजीयन के आधार पर पूरे खेत के धान की सरकारी खरीदी की जाएगी।
तैयारियों में जुटा प्रशासन
राज्य में 15 नवंबर से धान खरीदी का महाअभियान शुरू हो रहा है। इसके लिए खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग मिलकर खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में लगे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी की अंतिम गाइडलाइन और विस्तृत निर्देश जल्द जारी कर दिए जाएंगे। सरकार के इस कदम से प्रदेश के हजारों किसान परिवारों को सीधी राहत मिलेगी और खरीदी केंद्रों पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ और कागजी उलझनों से मुक्ति मिलेगी।

