Collector Jandarshan: पासिद रेत घाट में रोजगार की मांग, मुनगासेर सोसायटी के प्रभार पर शिकायत
Collector Jandarshan: महासमुंद के साप्ताहिक जनदर्शन में पासिद के मजदूरों ने रेत घाट में रोजगार मांगा, जबकि मुनगासेर कृषि साख समिति के सदस्यों ने प्रबंधक का प्रभार सौंपने पर शिकायत की।
प्रकाशित: 15 Oct 2026, 05:51 PM· 5 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
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Collector Jandarshan: महासमुंद जिले में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में ग्रामीणों और किसानों ने रोजगार से लेकर सहकारी समिति के संचालन तक से जुड़े मुद्दे उठाए। ग्राम पंचायत पासिद के मजदूरों ने रेत घाट में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की, वहीं मुनगासेर कृषि साख समिति के सदस्यों ने एक कर्मचारी को दोबारा समिति प्रबंधक का प्रभार सौंपे जाने पर आपत्ति जताते हुए कलेक्ट्रेट में शिकायत की।
दोनों मामलों में ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर उनकी समस्याओं पर कार्रवाई करने की मांग की है, एक ओर ग्रामीणों का कहना है कि गांव की प्राकृतिक संपदा से होने वाली गतिविधियों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलना चाहिए, वहीं दूसरी ओर मुनगासेर समिति के सदस्यों ने धान खरीदी में कमी और बकाया वसूली का मामला उठाते हुए प्रभार सौंपे जाने पर सवाल खड़े किए हैं।
आवेदन लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे ग्राम पंचायत पासिद के मजदूर और ग्रामीण
पासिद के मजदूरों की मांग- रेत घाट में स्थानीय लोगों को मिले काम
ग्राम पंचायत पासिद के मजदूरों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर गांव में संचालित रेत घाट में स्थानीय युवाओं और मजदूरों को काम देने की मांग की है। आवेदन के मुताबिक, गांव में पिछले 10 से 15 वर्षों से रेत घाट संचालित है, जहां चैन माउंटेन मशीन के माध्यम से वाहनों में रेत लोडिंग की जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि कार्य समाप्त होने के बाद गांव के कई युवा और मजदूर बेरोजगार हो जाते हैं। रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण उन्हें काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। उनका तर्क है कि रेत घाट में लोडिंग सहित अन्य कार्यों में स्थानीय लोगों को अवसर दिया जाए, तो गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो सकता है और पलायन की समस्या भी कम हो सकती है। मजदूर संघ और ग्रामवासियों ने प्रशासन से उनकी मांग पर विचार करते हुए उचित रोजगार उपलब्ध कराने की अपील की है।
गांव की संपदा से कारोबार, लेकिन स्थानीय रोजगार पर सवाल
पासिद के ग्रामीणों की मांग ने रेत खनन से जुड़े स्थानीय रोजगार और लाभ के बंटवारे के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की खनिज संपदा से जुड़े कारोबार में बड़े ठेकेदारों और शासन को राजस्व मिलता है, लेकिन स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पाता। वहीं, रेत घाट से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही और खनन गतिविधियों का प्रभाव भी स्थानीय ग्रामीणों को झेलना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण चाहते हैं कि खनन से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय लोगों को भी काम का अवसर मिले।
हालांकि, रेत घाट में मशीनों के उपयोग, श्रमिकों की नियुक्ति और खनन की अनुमति से संबंधित नियमों की स्थिति का निर्धारण संबंधित स्वीकृति और विभागीय प्रावधानों के आधार पर ही किया जा सकता है। ग्रामीणों के आवेदन में फिलहाल मुख्य मांग स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने की है।
रेत घाट में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग, मुनगासेर सोसायटी में प्रबंधक के प्रभार को लेकर शिकायतमुनगासेर सोसायटी में प्रबंधक का प्रभार सौंपने पर विवाद
जनदर्शन में दूसरा मामला मुनगासेर कृषि साख समिति से जुड़ा रहा। समिति के सदस्यों ने कर्मचारी यशवंत चंद्राकर को दोबारा समिति प्रबंधक का प्रभार दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं के आवेदन के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को आयोजित समिति की आमसभा में सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यशवंत चंद्राकर को समिति का प्रभार नहीं सौंपने की मांग की थी। इसके बावजूद समिति अध्यक्ष द्वारा उन्हें दोबारा प्रभार दिए जाने का आरोप लगाया गया है। सदस्यों ने प्रशासन से मामले की जांच कर प्रभार से हटाने की कार्रवाई करने की मांग की है।
धान खरीदी में 2,200 क्विंटल की कमी और 68.20 लाख रुपए की वसूली का दावा
मुनगासेर समिति के सदस्यों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024-25 की धान खरीदी के दौरान 2,200 क्विंटल धान की कमी सामने आई थी। आवेदन में यशवंत चंद्राकर के नाम पर 68 लाख 20 हजार रुपए की वसूली देय होने और इस संबंध में उप पंजीयक कार्यालय में प्रकरण चलने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वसूली का मामला लंबित है और समिति की आमसभा में भी प्रभार नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया गया था, तो ऐसे में उन्हें दोबारा समिति प्रबंधक का दायित्व सौंपना उचित नहीं है। हालांकि, धान की कमी, वसूली की राशि और लंबित प्रकरण की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है, शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है।
दोनों शिकायतों में ग्रामीणों और किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है, पासिद के मजदूर रेत घाट में स्थानीय रोजगार के अवसर चाहते हैं, जबकि मुनगासेर समिति के सदस्य प्रभार सौंपे जाने और वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जनदर्शन में प्राप्त इन शिकायतों पर संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं, पासिद में स्थानीय रोजगार की मांग पर प्रशासन का रुख क्या रहता है और मुनगासेर समिति के मामले में शिकायतों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।