Durg University News: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की 42वीं बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा अध्ययन, कृषि विज्ञान और भारतीय व विदेशी भाषाओं के अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने 12 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ग्रंथालय में की। इन फैसलों से विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ कृषि, भाषाओं और सामरिक अध्ययन जैसे नए क्षेत्रों में भी पढ़ाई के अवसर मिल सकेंगे। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग केंद्र पर भी निर्णय लिया गया।
AI और मशीन लर्निंग के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र
विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना को कार्यपरिषद ने मंजूरी दे दी है। पांच वर्षों की इस परियोजना पर करीब 35.48 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें से 18.46 करोड़ रुपये का अनुदान छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन से मांगा जाएगा। चार प्रयोगशालाएं, GPU कंप्यूट क्लस्टर से युक्त डेटा सेंटर, स्मार्ट कक्षाएं और इनक्यूबेशन स्पेस विकसित किए जाएंगे। योजना के तहत पांच वर्षों में 30 हजार विद्यार्थियों और 3 हजार शासकीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को AI और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के साथ नवाचार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा अध्ययन का भी खुलेगा संस्थान
कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा एवं सामरिक अध्ययन संस्थान स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। इसके संचालन के लिए सात शैक्षणिक और नौ तकनीकी एवं अशैक्षणिक पदों सहित कुल 16 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इन पदों पर सालाना करीब 1.91 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव को उच्च शिक्षा संचालनालय के माध्यम से राज्य शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
2027-28 से शुरू हो सकती है कृषि विज्ञान की पढ़ाई
विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा शुरू करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कृषि विज्ञान में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके लिए शुरुआती तौर पर 40 सीटें प्रस्तावित हैं। पाठ्यक्रम में पारंपरिक कृषि शिक्षा के साथ मधुमक्खी पालन और बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक विषयों को भी शामिल करने की योजना है।
छह भारतीय और विदेशी भाषाओं से होगी शुरुआत
विद्यार्थियों को नई भाषाएं सीखने और भाषा आधारित रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए भारतीय एवं विदेशी भाषा केंद्र की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। यह केंद्र सत्र 2027-28 से शुरू करने की योजना है। पहले चरण में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, छत्तीसगढ़ी, ओड़िया और मराठी भाषाओं की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से रूसी, स्पेनिश, कोरियाई, चीनी, अरबी, तमिल और उर्दू भाषाओं को भी शामिल करने की योजना है। भाषा केंद्र के शुरू होने से विद्यार्थियों को अनुवाद, संचार, पर्यटन और अन्य भाषा में कौशल विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
पात्र विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग
भारत सरकार की योजना के तहत विश्वविद्यालय में डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यहां पात्र अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे, बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना है।
एमएससी प्रयोगशालाओं के लिए 4 करोड़ रुपये मंजूरी
विज्ञान संकाय में प्रयोगशाला सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी बजट संबंधी निर्णय लिया गया। गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणी शास्त्र और वनस्पति शास्त्र के एमएससी पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक प्रयोगशाला उपकरण खरीदे जाएंगे। इस उद्देश्य से बजट में निर्धारित 400 लाख रुपये यानी चार करोड़ रुपये की राशि के प्राक्कलन को मंजूरी दी गई है।
बैठक में ये सदस्य रहे उपस्थित
कार्यपरिषद की बैठक में डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. राजलक्ष्मी सेलेट, डॉ. हंसा शुक्ला, विवेक मिश्रा और डॉ. शालिनी गुप्ता सदस्य के रूप में उपस्थित रहे। बैठक के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल पांडे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय में लिए गए इन फैसलों के जरिए तकनीकी शिक्षा, कृषि, भाषाओं, विशेष शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है। हालांकि, राज्य शासन से स्वीकृति की आवश्यकता वाले प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई संबंधित मंजूरी मिलने के बाद होगी।







