क्यों आक्रोशित हैं छात्र? मुख्य मांगें:
1. कॉपियों की निष्पक्ष जांच और संशोधित रिजल्ट
छात्रों का गंभीर आरोप है कि विश्वविद्यालय में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बेहद लापरवाही से किया जा रहा है। उनका कहना है कि सही ढंग से जांच न होने की वजह से कई होनहार और मेधावी छात्र भी अनुत्तीर्ण (फेल) हो गए हैं। छात्रों की मांग है कि कॉपियों का दोबारा निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए और संशोधित परीक्षा परिणाम तुरंत जारी किए जाएं।
2. 'ईयर बैक सिस्टम' को खत्म करने की मांग
विश्वविद्यालय में लागू ईयर बैक व्यवस्था को लेकर छात्रों में भारी असंतोष है। छात्रों का कहना है कि इस नियम की वजह से उनका पूरा एक साल बर्बाद हो जाता है, जिससे उन पर गंभीर मानसिक दबाव बनता है। छात्र चाहते हैं कि इस व्यवस्था को स्थायी रूप से खत्म कर कोई छात्र-हितैषी नियम लाया जाए।
3. 4 विषयों में नि:शुल्क पुनर्मूल्यांकन (Revaluation)
छात्रों की तीसरी प्रमुख मांग पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव को लेकर है। उनकी मांग है कि कम से कम 4 विषयों में री-मूल्यांकन अनिवार्य किया जाए और इसके लिए ली जाने वाली फीस पूरी तरह माफ हो। छात्रों का तर्क है कि जब गलती मूल्यांकन प्रणाली में है, तो इसकी आर्थिक भरपाई छात्रों से क्यों कराई जा रही है।
4. ग्रेस मार्क्स और RTI नियमों में राहत
इन मुख्य मांगों के अलावा, छात्रों ने मांग की है कि ग्रेस मार्क्स का दायरा बढ़ाया जाए ताकि मामूली अंकों से पिछड़ रहे छात्रों का साल खराब न हो। साथ ही, RTI (सूचना का अधिकार) प्रक्रिया के तहत लागू ‘Book Reference’ वाले नियम को भी तुरंत समाप्त करने की मांग की गई है।
क्या रहेगा आगे का रुख?
विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल बनने के आसार हैं। छात्रों के इस रुख को देखते हुए प्रशासनिक भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के इस रुख पर क्या कदम उठाता है और वार्ता के जरिए क्या समाधान निकल पाता है।






