₹3,358 प्रति क्विंटल धान खरीदने की मांग
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का ₹1700 करोड़ का बोनस बकाया
किसान संघ की प्रमुख मांगें (एक नज़र में):
संघ ने अपने ज्ञापन में किसानों से जुड़ी कई अन्य व्यावहारिक समस्याओं और व्यवस्थागत सुधारों की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया है:
खरीदी की समय-सीमा और वजन: धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से बढ़ाकर 15 फरवरी तक की जाए। साथ ही प्रति कट्टा (तौल) अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम लेने का स्पष्ट आदेश जारी हो।
टोकन व्यवस्था में सुधार: पारदर्शी व्यवस्था के तहत बड़े किसानों को 5, छोटे किसानों को 3 और सीमांत किसानों को 2 टोकन देने की मांग की गई है। इसके अलावा दबाव डालकर किसानों से 'खाता समर्पण' कराने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने को कहा गया है।
गो-संवर्धन और नई योजनाएं: 'गोवंदन योजना' को जल्द लागू करने और 'जी-राम-जी योजना' को गो-संरक्षण व गो-संवर्धन से जोड़ने की बात कही गई है।
फसल नुकसान और ब्लैक मार्केटिंग: हाल ही में बाढ़ से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। वहीं, तय दाम से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अन्य फसलें और जल संरक्षण: भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मक्का और गेहूं की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीदी शुरू की जाए। भू-अधिग्रहण के मामलों में उदयपुर डिक्लेरेशन के मानकों का पालन हो।
धान और बोनस: छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बिंदु
छत्तीसगढ़ में धान की राजनीति हमेशा से सत्ता की कुंजी रही है।
भाजपा सरकार का पिछला फैसला: पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के समय वर्ष 2014-15 और 2015-16 का रुका हुआ दो साल का बोनस विष्णु देव साय सरकार ने सत्ता में आते ही 25 दिसंबर 2023 (सुशासन दिवस) को जारी किया था। उस दौरान 12 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,716 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
राजनीतिक गलियारों की चर्चा: जानकारों का मानना है कि पिछले कार्यकाल में बोनस न मिल पाना डॉ. रमन सिंह सरकार की हार का बड़ा कारण बना था। इसके बाद कांग्रेस ने बोनस भुगतान और धान के दाम बढ़ाने का वादा कर सत्ता हासिल की थी। अब एक बार फिर बोनस का मुद्दा गरमाने लगा है।
किसने क्या कहा?
"धान खरीदी को लेकर सरकार की तैयारियां तेजी से जारी हैं। किसी संगठन ने धान की कीमत बढ़ाने को लेकर ज्ञापन या मांग पत्र दिया है, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है।"
— रामविचार नेताम, कृषि मंत्री, छत्तीसगढ़
"हमने बकाया बोनस और धान का खरीदी मूल्य बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। किसान अपनी वाजिब मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।"
— माधो सिंह ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ







