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Demand for payment of outstanding bonus (Image Source: Keertiman Media)
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Chhattisgarh Farmers News: धान के दाम 3,358 रुपए करने की मांग, 1700 करोड़ के बोनस पर फंसा पेंच, 27 को मंत्रालय घेराव की चेतावनी

Chhattisgarh Farmers News: धान खरीदी का सीजन शुरू होने से पहले भारतीय किसान संघ ने धान का खरीद मूल्य बढ़ाकर ₹3,358 प्रति क्विंटल करने और वर्ष 2022-23 के बकाया धान बोनस के करीब ₹1,700 करोड़ का भुगतान करने की मांग की है। संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र भेजकर खरीदी की अवधि बढ़ाने, टोकन व्यवस्था में सुधार और किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की है। मांगों पर जल्द निर्णय नहीं होने पर 27 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय के घेराव की चेतावनी दी गई है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 14 Oct 2026, 09:21 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh Farmers News: प्रदेश में धान खरीदी का सीजन करीब आते ही किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत और सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारतीय किसान संघ (छत्तीसगढ़ इकाई) ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर धान खरीदी की दर बढ़ाने और बकाया बोनस के तत्काल भुगतान की मांग की है। किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 27 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय का घेराव करेंगे।

₹3,358 प्रति क्विंटल धान खरीदने की मांग 

भारतीय किसान संघ का तर्क है कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन सालों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कुल 258 रुपए की बढ़ोतरी की है। वर्तमान में राज्य में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है, जबकि एमएसपी 2,441 रुपए से 2,461 रुपए के बीच है। संघ की मांग है कि केंद्र की ओर से हुई इस ₹258 की वृद्धि को राज्य के खरीद मूल्य में जोड़ा जाए, जिससे किसानों को इस सत्र में ₹3,358 प्रति क्विंटल का भाव मिले।

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का ₹1700 करोड़ का बोनस बकाया 

मूल्य वृद्धि के साथ ही किसान संघ ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय का रुका हुआ बोनस जारी करने का मुद्दा भी पुरजोर ढंग से उठाया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2022-23 की चौथी किस्त का लगभग 1,700 करोड़ रुपए का धान बोनस अब तक किसानों को नहीं मिला है। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि त्योहारों और खरीदी सीजन को ध्यान में रखते हुए इस राशि का अविलंब भुगतान किया जाए।

किसान संघ की प्रमुख मांगें (एक नज़र में):

संघ ने अपने ज्ञापन में किसानों से जुड़ी कई अन्य व्यावहारिक समस्याओं और व्यवस्थागत सुधारों की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया है:

  • खरीदी की समय-सीमा और वजन: धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से बढ़ाकर 15 फरवरी तक की जाए। साथ ही प्रति कट्टा (तौल) अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम लेने का स्पष्ट आदेश जारी हो।

  • टोकन व्यवस्था में सुधार: पारदर्शी व्यवस्था के तहत बड़े किसानों को 5, छोटे किसानों को 3 और सीमांत किसानों को 2 टोकन देने की मांग की गई है। इसके अलावा दबाव डालकर किसानों से 'खाता समर्पण' कराने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने को कहा गया है।

  • गो-संवर्धन और नई योजनाएं: 'गोवंदन योजना' को जल्द लागू करने और 'जी-राम-जी योजना' को गो-संरक्षण व गो-संवर्धन से जोड़ने की बात कही गई है।

  • फसल नुकसान और ब्लैक मार्केटिंग: हाल ही में बाढ़ से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। वहीं, तय दाम से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • अन्य फसलें और जल संरक्षण: भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मक्का और गेहूं की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीदी शुरू की जाए। भू-अधिग्रहण के मामलों में उदयपुर डिक्लेरेशन के मानकों का पालन हो।

धान और बोनस: छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बिंदु

छत्तीसगढ़ में धान की राजनीति हमेशा से सत्ता की कुंजी रही है।

  • भाजपा सरकार का पिछला फैसला: पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के समय वर्ष 2014-15 और 2015-16 का रुका हुआ दो साल का बोनस विष्णु देव साय सरकार ने सत्ता में आते ही 25 दिसंबर 2023 (सुशासन दिवस) को जारी किया था। उस दौरान 12 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,716 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।

  • राजनीतिक गलियारों की चर्चा: जानकारों का मानना है कि पिछले कार्यकाल में बोनस न मिल पाना डॉ. रमन सिंह सरकार की हार का बड़ा कारण बना था। इसके बाद कांग्रेस ने बोनस भुगतान और धान के दाम बढ़ाने का वादा कर सत्ता हासिल की थी। अब एक बार फिर बोनस का मुद्दा गरमाने लगा है।

    किसने क्या कहा?

"धान खरीदी को लेकर सरकार की तैयारियां तेजी से जारी हैं। किसी संगठन ने धान की कीमत बढ़ाने को लेकर ज्ञापन या मांग पत्र दिया है, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है।"

— रामविचार नेताम, कृषि मंत्री, छत्तीसगढ़

"हमने बकाया बोनस और धान का खरीदी मूल्य बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। किसान अपनी वाजिब मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।"

— माधो सिंह ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ

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