Bastar Dussehra 2026: विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत के साथ ही पूरे संभाग में उत्सव का माहौल है। 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक और अनूठे पर्व में 12 से अधिक पारंपरिक और अद्भुत रस्मों को बेहद धूमधाम के साथ निभाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद से मुक्त होने के बाद यह पहला बस्तर दशहरा है, जिसको लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर से आए पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बस्तर संभाग के सातों जिलों से हजारों की संख्या में ग्रामीण भी इन पारंपरिक रस्मों के साक्षी बनने जगदलपुर पहुँच रहे हैं।
भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती
भारी जनसैलाब और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। भीड़ नियंत्रण और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हजारों की भीड़ को देखते हुए किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से शहर भर में करीब 400 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जो 24 घंटे पालीवार (शिफ्ट में) अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। इसके अलावा, शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से पल-पल की निगरानी रखी जा रही है।
असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर, पुलिस सहायता केंद्र स्थापित
मामले की जानकारी देते हुए बस्तर एसपी ने बताया कि पुलिस बल असामाजिक तत्वों और संदिग्ध गतिविधियों पर पूरी पैनी नज़र रखे हुए है। पर्व से जुड़ी सभी प्रमुख रस्मों के स्थलों पर जवानों की विशेष तैनाती की गई है। इसके साथ ही, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सहूलियत के लिए विभिन्न स्थानों पर 'पुलिस सहायता केंद्र' भी बनाए गए हैं, ताकि किसी को भी किसी तरह की परेशानी या असुविधा का सामना न करना पड़े।
क्या है 75 दिनों के इस पर्व का इतिहास?
14वीं-15वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजाओं द्वारा शुरू किया गया बस्तर दशहरा दुनिया का सबसे लंबे समय (75 दिन) तक चलने वाला लोक पर्व है। इस पर्व का सबसे प्रमुख और भव्य आकर्षण यहाँ का पारंपरिक विशाल रथ होता है, जिसे खींचने के लिए दूर-दराज से लोग पहुँचते हैं। क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने के बाद इस बार बस्तर की फिज़ा में सुरक्षा के विश्वास और सांस्कृतिक धरोहर की चमक एक साथ देखने को मिल रही है।







